हालांकि एक सफल गृहणी से फूड बिजनेस की मालकिन बनाने का सफर आसान नहीं था। 1982 में नीता मेहता के पति का दवाइयों का बिजनेस था, जिससे कमाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में नीता ने अपने पति की मदद करने और घर की जिम्मेदारी उठाने का फैसला लिया। उन्होंने शुरुआत कुकिंग क्लास से की। मात्र 100 रुपये की फीस में वह कुकिंग क्लास लेती थीं। नीता कुकिंग क्लास में अपने स्टूडेंट्स को घर पर ही आइसक्रीम बनाना सिखाती थीं।
नीता मेहता की कुकिंग क्लासेज फेमस होने लगी तो उन्होंने अपनी पहली किताब 'वेजिटेरियन वंडर्स' पब्लिश कराई। इसके लिए नीता के पति ने अपनी एफडी तुड़वा दिया था।
नीता मेहता की उपलब्धि
अब तक उनकी 400 किताबें छप चुकी हैं। नीता मेहता की किताब ‘फ्लेवर्स ऑफ इंडियन कुंकिंग’ को पेरिस विश्व कुक बुक फेयर अवार्ड भी मिला है। नीता मेहता का स्नैब पब्लिशर्स नाम का खुद का पब्लिशिंग हाउस है।