मान्या ने लिखा है कि मैंने खाने और नींद के बिना कई रातें बिताई हैं। मैं कई मील पैदल चलती थी ताकि रिक्शा के पैसे बचा सकूं। मेरे खून, पसीने और आंसुओं की बदौलत मैंने अपने सपने को पूरा किया है। ऑटोरिक्शा वाले की बेटी होने की वजह से जल्दी ही मेरा स्कूल छूट गया और मुझे कम उम्र में ही काम की तलाश करनी पड़ी।
मान्या के संघर्ष की दास्तान केवल यहीं तक नहीं है। वो आगे बताती हैं कि मां ने मेरी परीक्षा की फीस भरने के लिए अपने गहने गिरवी रख दिए थे। 14 साल की उम्र में मैं घर से भाग गई। दिन में पढ़ती और शाम को बर्तन धोती। साथ ही रात में कॉल सेंटर में काम करती थी। आज मैं इस मंच पर सिर्फ अपने माता-पिता और भाई की वजह से हूं। इन्होंने मुझे सिखाया कि अगर खुद पर विश्वास है तो सपने पूरे होते हैं।"