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मेघा परमार: हौसले, हिम्मत और जुनून का शिखर, सात मार्च को शाम साढ़े सात बजे मिलिए लाइव

Sat, 06 Mar 2021 08:26 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मेघा परमार - फोटो : अमर उजाला
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कामयाब होने की एकमात्र वजह हो सकती है कि आप कोई भी काम को हौसले, हिम्मत और जुनून के साथ करें। इसी को कर दिखाया है माउंट एवरेस्ट विजेता मेघा परमार ने। 22 मई 2019 को सुबह पांच बजे मेघा ने एवरेस्ट फतह कर लिया। दरअसल, पहले प्रयास में मेघा माउंट एवरेस्ट फतह करने से महज 700 फुट से चूक गई थीं। ट्रेनिंग के दौरान चोटिल होने के बाद मेघा को रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कराना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। भारत की बेटी मेघा सात मार्च को शाम साढ़े सात बजे अमर उजाला की विशेष प्रस्तुति के तहत लाइव कार्यक्रम में शिरकत करेंगी।

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आपके अंदर कामयाबी का जुनून होना बहुत जरूरी
हाल ही में दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम के दौरान मेघा ने बताया था कि आपको फिजिकल फिटनेस के लिए रोज कड़ा परिश्रम और मानसिक फिटनेस के लिए योग व प्राणायाम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आप कामयाब होना चाहते हैं तो आपके अंदर कामयाबी का जुनून होना चाहिए। आपका जुनून आपसे वह सब कराता है, जिसे आप करने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकते।

मेघा ने सुनाई आपबीती
मेघा ने आगे बताया कि एवरेस्ट यात्रा के दौरान हमेशा पीने के लिए पानी नहीं मिल पाता था। हर समय शरीर अंदर से टूटता था। सांस नहीं ली जाती थी। सीढ़ियां पार करते समय पैर कांपते थे। उस वक्त मैंने अपनी हिम्मत बढ़ाई और खुद से कहा कि रुको मत। यह भी हो जाएगा। मेघा ने एवरेस्ट यात्रा की घटनाओं का सजीव वर्णन करते हुए कहा कि किस तरह एक पर्वतारोही को यात्रा के दौरान मरे हुए लोगों की लाशों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हम जब हाई एल्टीट्यूड पर पहुंचते हैं तो वहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है।
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सीहोर के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
मेघा मध्यप्रदेश के छोटे से जिले सीहोर के छोटे से गांव भोज नजर से आती हैं। बचपन में ही उन्होंने एवरेस्ट चढ़ने का सपना देखा था। घरवालों का साथ मिलता गया और वह और ऊंचाई पर चढ़ती गईं। 25 वर्षीय यह पर्वतारोही एक किसान परिवार से आती हैं।

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