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Zulekha Daud: मजदूर की बेटी बनी दुबई की सबसे अमीर भारतीय महिला, खड़ी की 3600 करोड़ की फर्म, जानें कौन हैं जुलेखा

Tue, 19 Sep 2023 04:34 PM IST
मेघा कुमारी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Zulekha Daud - फोटो : Amarujala
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Success Story of Zulekha Daud: "शिक्षा सरोवर का रस पीने वाला है सर्वोत्तम, इसको ग्रहण करने वाला बन जाता है उत्तम" ये कविता तो आप सभी ने सुनी होगी। इंसान की परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, लेकिन उसे हमेशा सही शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए। लेकिन यह तभी संभव है जब हमारी इच्छाशक्ति और मेहनत दोनों ही मजबूत हो। जीवन में कामयाब होने से पहले हमारे हौसलों का बुलंद होना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देते हैं। लेकिन ऐसी परिस्थिति में भी कोई सफल हो जाए, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। ऐसी ही कहानी है डॉ जुलेखा दाऊद की, जिन्होंने परिवार की गरीबी और संघर्ष के बीच देश से निकलकर परदेश में नाम कमाया। परिस्थितियों के विपरीत काम करना अपने में ही बड़ी उपलब्धि है। इसी कड़ी में आइए डॉ जुलेखा दाऊद के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

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कौन हैं डॉ जुलेखा दाऊद
डॉ जुलेखा दाऊद, "जुलेखा हॉस्पिटल ग्रुप" की चेयरमैन हैं। वह अपनी सोच, मेहनत और समाज सेवा के लिए जानी जाती है। 84 वर्षीय डॉ. ज़ुलेखा दाऊद का जन्म महाराष्ट्र के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी कर के घर चलाते थे। आर्थिक तंगी और मुश्किलों के बीच भी ज़ुलेखा ने अपनी पढ़ाई को जारी रखने का फैसला किया। 

यहां से की पढ़ाई
डॉ ज़ुलेखा ने भारत के नागपुर में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से स्त्री रोग में एमबीबीएस की विशेषज्ञता हासिल की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ज़ुलेखा यूएई चली गईं। बड़ी बात ये है कि, वह पहली भारतीय डॉक्टर बनीं जिन्होंने यूएई में मेडिसिन की प्रैक्टिस शुरू की थी। उन्होंने कई लोगों की सेवा की। आपको जानकर हैरानी होगी कि, डॉ जुलेखा दाऊद ने दुबई में 10,000 बच्चों की डिलीवरी कराई है।

जुलेखा दाऊद ने 60 साल पहले दुबई में मेडिकल करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद डॉ जुलेखा दाऊद ने 1992 में "जुलेखा हॉस्पिटल ग्रुप" की शुरुआत की ताकि लोगों को बेहतर हेल्थ केयर सुविधाएं मुहैया कराई जा सके।

संघर्ष की कहानी
डॉ ज़ुलेखा की मेहनत का ही ये फल है कि, वर्तमान में यूएई के साथ-साथ उनके भारत में भी दो अस्पताल हैं। बता दें, डॉ दाऊद 1964 में शारजाह में काम करने भारत से आई थीं। हालांकि, इससे पहले वह कुवैत में अमेरिकन मिशन अस्पताल में काम करती थी। 1992 में उन्होंने शारजाह में पहला निजी अस्पताल स्थापित किया, जिसका नाम था जुलेखा अस्पताल। वर्तमान में शारजाह और दुबई के दो अस्पतालों के बीच अमीरात के तीन चिकित्सा केंद्रों में ज़ुलेखा समूह सालाना 550,000 लोगों का इलाज करता है। ये उनका संघर्ष ही है कि, उनका ये समूह लोगों का इलाज कर के रोगियों की जान बचा रहा है। 

दूर दूर से इलाज करवाने आते थे लोग 
यू तो डॉक्टर जुलेखा स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं। हालांकि, उन्होंने अपनी भूमिका हर जगह बखूबी निभाई। चेचक से लेकर वायरल संक्रमण तक कई रोगों का इलाज उन्होंने किया है। कहा जाता है कि, उस दौरान मलेरिया का जबरदस्त प्रकोप था। ऐसे में दूर दूर से लोग डॉक्टर जुलेखा से इलाज कराने आते थे। व्यक्ति की हालत गंभीर होने पर भी डॉक्टर जुलेखा उसका केस संभालती थी।
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पुरस्कार और सम्मान
डॉक्टर जुलेखा की मेहनत को देश सलाम करता है। उनके कठिन परिश्रम का सम्मान करना हम सभी का फर्ज है। वहीं 23 जनवरी 2019 को डॉ ज़ुलेखा को प्रवासी भारतीयों के लिए भारत के शीर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डॉ ज़ुलेखा के लिए वह पल बहुत खास था जब उनके महामहिम और यूएई के विदेश मामलों के मंत्री ने उनको सम्मानित किया। डॉ ज़ुलेखा को कई अन्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है और हो भी क्यों न उनकी मेहनत ने देश का भी नाम रोशन किया है।
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