इतिहास में कई ऐसी महिलाओं के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने महिलाओं को केवल घर-परिवार या पिता व पति की विरासत संभालने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बल के दम का भी प्रदर्शन किया। ये बल केवल किसी एक महिला की ताकत भर का नहीं था, बल्कि महिलाओं को सेवा में सहभागी बनाने का था। इस दौर में कई महिलाएं भारतीय सेना में उच्च पदों पर हैं लेकिन महिलाओं को इस क्षेत्र तक पहुंचाने का श्रेय रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं को जाता है, जिन्होंने महिला सेना का गठन किया।इन्हीं वीर महिलाओं में रानी मल्लम्मा का नाम भी शामिल है, जो महिला सैनिक सेना बनाने वाली पहली रानी थीं।
रानी मल्लम्मा का परिचय
रानी मल्लम्मा सोधे (वर्तमान उत्तर कन्नड़ और दक्षिणी गोवा के बीच) के राजा मधुलिंगा की बेटी थीं। मल्लम्मा को उनके भाइयों की तरह ही शिक्षा और युद्ध कला दोनों का प्रशिक्षण दिया गया। वह घुड़सवारी, भाला फेंक और तीरंदाजी में कौशल थीं। मल्लम्मा के गुरु शंकर भट्ट थे।
बेलावाड़ी के राजा से विवाह
मल्लम्मा का स्वयंवर बेलावाड़ी के राजा ईशप्रभु से हुआ। शादी के बाद वह पति संग राज्य के प्रशासनिक कार्यों में मदद करने लगीं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं की एक सेना तैयार की। इस सैन्य टुकड़ी में पांच हजार महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें इतिहास की पहली सैन्य टुकड़ी कहा जा सकता है।
मराठा सैनिकों से युद्ध
रानी मल्लम्मा ने छत्रपति शिवाजी की विशाल सेना का भी सामना किया और अपनी महिला सैन्य टुकड़ियों के साथ अंतिम समय तक युद्ध के मैदान में डटी रहीं। कहते हैं कि जब शिवाजी महाराज छोटी बड़ी रियासतों को जीतकर या संधि करते हुए बेलावाड़ी पहुंचे तो यहां यादवाड़ गांव में उनके सैनिकों ने डेरा डाला। बेलवाड़ी के राजा ईशप्रभु शिवाजी के प्रशंसक थे। वह अपने राज्य में मराठा शासक और उनके सैनिकों के स्वागत की तैयारी कर रहे थे लेकिन मराठा सैनिकों ने उनके राज्य के किसानों के साथ अनुचित व्यवहार किया, जिसे दोनों राज्यों की सेना आमने सामने आ गईं।
रानी मल्लम्मा ने अपनी महिला सैनिकों के साथ मराठा सेना को धूल चटाते हुए 10 सैनिकों को मौत और 200 से अधिक को घायल कर दिया। जब शिवाजी को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपने सैनिकों को गलत व्यवहार के लिए फटकार लगाई लेकिन महिला सैनिकों से मिली हार के कारण अपनी साख को बचाने के लिए बेलावाड़ी से युद्ध का आदेश दे दिया। 15 दिन चले युद्ध में राजा ईशप्रभु की मृत्यु हो गई। उस समय रानी मल्लम्मा की गोद में चार माह का बच्चा था, वह फिर भी युद्ध मैदान में कूद गईं।
शिवाजी ने मांगी माफी
27 दिन से अधिक समय तक युद्ध चला और रानी को हार का सामना करना पड़ा। रानी को बंधक बनाकर मराठा सैनिक शिवाजी के पास ले गए, जहां रानी मल्लम्मा ने उनके सैनिकों के व्यवहार की घोर निंदा की। जिस पर शिवाजी ने उनसे माफी मांगी और राज्य लौटा दिया और अपराधी सैनिकों को दंड भी दिया।