गायत्री देवी का राजनीतिक जीवन
वैसे तो राजकुमारी शादी के बाद जयपुर का महारानी बन गई थीं। पैदाइश बंगाल की और शादी राजपूतों में लेकिन उन्हें न तो बंगाली और न ही राजस्थानी भाषा सही से बोलनी आती थी। वह अंग्रेजी और फ्रेंच में बात किया करती थीं। उस दौर में उन्हें दुनिया की सबसे सुंदर महिला का खिताब मिला था। वोग मैगजीन में छपी लिस्ट में उन्हें स्थान मिला था। हालांकि राजनीति में भी गायत्री देवी को अपनी बेबाकी के लिए जाना जाता था। साल 1962 में महारानी गायत्री देवी ने स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और 1 लाख 92 हजार वोटों से जीत गईं। उस समय इतनी बड़ी जीत के कारण उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था।
इंदिरा गांधी और गायत्री देवी का विवाद
यहां से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुआ। एक बार संसद में जवाहर लाल नेहरू से उनकी बहस हो गई थी। नेहरू और गायत्री देवी के बीच राजनीतिक विरोध था लेकिन इंदिरा गांधी जब राजनीति में आईं तो यह विरोध राजनीतिक नहीं बल्कि निजी बन गया। दरअसल गायत्री देवी और इंदिरा गांधी दोनों एक दूसरे को बचपन से जानती थीं। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के बनाएं शांतिनिकेतन स्कूल में दोनों पढ़ाई की थी। एक बार सदन में इंदिरा ने गायत्री देवी को कांच की गुड़िया कह कर पुकारा था। दोनों एक दूसरे के प्रतिद्वंदी थे। दोनों के बीच एक किस्सा मशहूर है कि इंदिरा गांधी ने महारानी गायत्री देवी को जेल में डालकर जयगढ़ के किले में फौज भेज दी थी।