फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

First Tribal Air Hostess: मिलिए गोपिका गोविंद से, जो हैं केरल की पहली आदिवासी महिला एयरहोस्टेस

Fri, 11 Apr 2025 05:19 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

गोपिका गोविंद की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और राह में थोड़ी सी मदद मिल जाए, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। वह आज लाखों आदिवासी बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं। 
विज्ञापन
गोपिका गोविंद - फोटो : instagram
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Kerala's First Tribal Air Hostess: जब कोई व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों से जूझकर अपने लक्ष्य को हासिल करता है तो वह सफलता न केवल उसकी अपनी होती है, बल्कि समाज और राज्य के लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है केरल की गोपिका गोविंद ने, जिन्होंने सपने देखे और उसे साकार करने के लिए राह में आने वाली कठिनाइयों को सामना भी किया। गोपिका गोविंद केरल की पहली आदिवासी एयर होस्टेस बनी हैं। गोपिका गोविंद की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और राह में थोड़ी सी मदद मिल जाए, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। वह आज लाखों आदिवासी बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं। 

विज्ञापन



गोपिका गोविंद का परिचय

गोपिका का जन्म केरल के अलाकोडे क्षेत्र की एसटी कॉलोनी वाकुन कुडी में हुआ। उनके पिता का नाम पी. गोविंदन और मां का नाम वी. जी. है। गोपिका करीम बाला जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। उनका बचपन आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच गुजरा। फिर भी उन्होंने हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना देखा।

बचपन में देखा था आसमान छूने का सपना

छोटी सी उम्र में जब उन्होंने अपने घर की छत से हवाई जहाज को उड़ते देखा, तब उनके मन में आसमान में उड़ने की चाह जगी। उन्होंने ठान लिया कि एक दिन वह खुद हवाई जहाज का हिस्सा बनेंगी और एयर होस्टेस बनकर दिखाएंगी।
विज्ञापन



The Women's Village: 'बहुओं का गांव' के नाम से मशहूर हो रही यह जगह, महिलाओं की खास पहल बनी वजह


सपनों की राह में आई मुश्किलें

एयर होस्टेस बनने के लिए गोपिका को एक विशेष कोर्स करना था, लेकिन जैसे ही उन्हें इसकी फीस का पता चला तो परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते सपना अधूरा पड़ता दिखा। एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने यह सपना छोड़ने का मन बना लिया था।

सरकारी सहायता बनी उम्मीद की किरण

तभी गोपिका को जानकारी मिली कि सरकार अनुसूचित जनजाति की छात्राओं को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देती है। गोपिका ने आईएटीए कस्टमर सर्विस केयर में डिप्लोमा किया और बाद में ड्रीम स्काई एविएशन ट्रेनिंग एकेडमी, वायानाड में दाखिला लिया। सरकार ने उनके कोर्स के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

12 साल बाद मिला सपना सच करने का मौका

लगातार 12 साल की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास के बाद आखिरकार गोपिका गोविंद का सपना सच हुआ और वे एयर होस्टेस बनीं। उनका यह मुकाम सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह समाज की उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी ऊंची उड़ान भरने का सपना देखती हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें