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Judge Thanya Nathan C: कौन हैं थान्या नाथन सी? जिन्होंने पूर्ण दृष्टिहीन होने के बावजूद रचा इतिहास

Tue, 10 Feb 2026 10:07 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

First Woman Blind Judge: केरल की 24 वर्षीय वकील थान्या नाथन सी भारत की पहली पूर्ण दृष्टिबाधित महिला जज बनने जा रही हैं। सिविल जज परीक्षा में टॉप कर उन्होंने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प, शिक्षा और तकनीक के सहारे कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती।
 
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Thanya Nathan C - फोटो : instagram
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विस्तार
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केरल की युवा वकील थान्या नाथन सी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। बताया जा रहा है कि वह भारत की पहली पूर्ण दृष्टिबाधित महिला जज बनने जा रही हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ केरल, बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में भी एक ऐतिहासिक मोड़ मानी जा रही है। जहाँ अक्सर शारीरिक सीमाओं को कमजोरी माना जाता है, वहीं थान्या नाथन ने इन्हें अपनी ताकत बनाकर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और सही अवसर मिल जाए तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।

सिविल जज परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता

हाल ही में आयोजित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में थान्या नाथन सी ने Benchmark Disabilities श्रेणी के उम्मीदवारों में प्रथम स्थान हासिल किया। यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि थान्या पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित (100% blind) हैं, फिर भी उन्होंने कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली इस परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

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शिक्षा से न्यायालय तक का सफर

  • थान्या नाथन की उम्र: 24 वर्ष

  • शिक्षा: LLB – कन्नूर यूनिवर्सिटी (Kannur University)

  • उपलब्धि: LLB में प्रथम रैंक


कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने:

  • ब्रेल लिपि (Braille Script)

  • स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया।

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वकालत का अनुभव

जज बनने से पहले थान्या ने:

  • कन्नूर के तालीपरंबा में

  • वरिष्ठ अधिवक्ता के. जी. सुनीलकुमार के अधीन

  • जूनियर वकील के रूप में प्रैक्टिस शुरू की

वकालत के दौरान वह:

  • अपनी दलीलें

  • केस नोट्स

ब्रेल लिपि में तैयार करती थीं, जो उनके अनुशासन और तैयारी को दर्शाता है।


चुनौतियाँ और समाधान

थान्या नाथन मानती हैं कि पुराने हस्तलिखित दस्तावेज़ पढ़ना एक चुनौती हो सकता है लेकिन उनका विश्वास है कि तकनीक, अनुभव, और सिस्टम में सुधार इन चुनौतियों को दूर करने में मदद करेंगे।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम भूमिका

थान्या ने अपनी सफलता का श्रेय:

  • अपने सीनियर्स के प्रोत्साहन

  • और सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को दिया

जिसने दिव्यांगजनों के लिए न्यायपालिका के दरवाज़े पूरी तरह खोल दिए और समान अवसर सुनिश्चित किए।


केरल न्यायपालिका में नई शुरुआत

थान्या नाथन की नियुक्ति केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि इससे:

  • अदालतों के Infrastructure को दिव्यांग-अनुकूल बनाने

  • Accessibility और Inclusivity पर ज़्यादा ध्यान देने

की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

 

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