49 देशों की पांच हजार रचनाओं में शामिल कृतिका की रचना ने इस पुरस्कार को जीता है। इसके अलावा कृतिका को एशिया की रीजनल विनर भी घोषित किया गया है। कृतिका ने बताया कि उसे इस कहाना का आइडिया मॉब लिचिंग जैसी घटनाओं को सुनने के बाद आया। जुलाई 2019 में अपने घर मां-पिता के पास पहुंची कृतिका ने तबरेज अंसारी की मॉब लिचिंग के बारे में सुना जो उनके घर से थोड़ी ही दूरी पर रहता था। वहीं तबरेज की बीवी शाइस्ता अंसारी जिसकी नई शादी हुई थी का मिसकैरेज हो गया। कृतिका कहती हैं कि उन्होंने ये कहानी उस महिला पर लिखी है जिसका इस मॉब लिचिंग की वजह से सबकुछ उजड़ गया।
कृतिका कहती हैं कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग जाति प्रथा के डर के साए में जीते हैं। वहीं यहां पर कैसे राजनीति और रसूखवाले लोग अपनी मनमानी करते दिखते हैं। कृतिका की कहानी एक ऐसी महिला की है जो अपने पिता की चाय की दुकान को संभालने में मदद करती है। जहां पर आने वाले एक मुस्लिम लड़के से उसे प्यार हो जाता है। मिस पांडे ने एक दृढ़ निश्चय वाली महिला की कहानी लिखी है।