ईरा कुकरेती की शिक्षा और करियर
ईरा ने भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईएम लखनऊ और आईएसबी हैदराबाद से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में बतौर मानव संसाधन विशेषज्ञ (HR Professional) काम किया और कई लोगों के नेतृत्व कौशल को आकार दिया। लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका।
आध्यात्मिकता की ओर कदम
कॉरपोरेट की व्यस्तता के बीच उन्होंने महसूस किया कि असली शांति और संतुलन भीतर से आता है। इसी सोच ने उन्हें रेकी, माइंडफुलनेस, और एनएलपी (Neuro Linguistic Programming) की ओर आकर्षित किया। उन्होंने इन तकनीकों को अपने जीवन में अपनाया और धीरे-धीरे लोगों की हीलिंग (उपचार) करना शुरू किया।
ईरा एक हीलर
ईरा आज एक रेकी मास्टर, अकाशिक रीडर, शमनिक प्रैक्टिशनर, एनिमल कम्युनिकेटर और माइंडफुल एक्सपर्ट हैं। वह न केवल शरीर और मन का उपचार करती हैं, बल्कि आत्मा के स्तर पर भी लोगों को सशक्त बनाती हैं।उनका मानना है कि हर इंसान के भीतर एक शक्ति है, जिसे सही मार्गदर्शन से जाग्रत किया जा सकता है। उनकी हीलिंग यात्राएं केवल किसी बीमारी या मानसिक तनाव का उपचार नहीं, बल्कि आत्मा की घर वापसी है, जहां शांति, सहजता और संतुलन है।
जानवरों से संवाद करने की कला
ईरा का एक विशेष गुण है, जानवरों से संवाद करने की क्षमता। वह जानवरों के दर्द, इच्छाओं और भावनाओं को समझ कर इंसानों तक पहुंचाने का काम करती हैं। यह उन्हें केवल एक हीलर नहीं बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच सेतु बनाता है।
आध्यात्मिक विरासत
ईरा की प्रेरणा स्रोत उनकी दादी हैं, जो एक पारंपरिक आध्यात्मिक गुरु थीं। बचपन से ही उन्होंने योग, ध्यान और ऊर्जा चिकित्सा को करीब से देखा और महसूस किया। यही ज्ञान उन्होंने आधुनिक विज्ञान और कॉरपोरेट समझ के साथ जोड़कर एक होलिस्टिक हीलिंग मॉडल तैयार किया।