अपर्णा कुमार, डीआईजी, सेक्टर हेडक्वार्टर, देहरादून, आईटीबीपी
अपर्णा कुमार यूपी कैडर की आईपीएस अधिकारी होने के साथ पर्वतारोही भी हैं। वे बताती हैं कि तपोवन में आपदा की सूचना सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर मिली, तो मैंने अपनी पूरी बटालियन को अलर्ट कर दिया और तत्काल बचाव अभियान शुरू कराया। मैं खुद करीब बारह घंटे की यात्रा कर घटना वाले दिन रात 10 बजकर 15 मिनट पर जोशीमठ पहुंची।
आईटीबीपी की टीमें तपोवन के साथ रैणी गांव में राहत और बचाव कार्य में जुटी थीं, हमारी प्राथमिकता लोगों को समय रहते जीवितनिकालना था लेकिन सबकुछ तहस नहस होने से कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मिशन की शुरुआत कहां से करनी है। बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़े, ठंडे पानी और कीचड़ के बीच कठिन और डरावनी परिस्थिति में टीम ने पूरे जोश के साथ काम किया। आपदा की स्थिति में काम का ये मेरा पहला अनुभव था और मुझे मेरी टीम पर गर्व है।
एक लड़के पर विश्वास कर हम आगे बढ़े
स्थानीय लड़के ने बताया कि एक टनल में 12 लोग हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं था। टीम ने उस लड़के पर विश्वास कर जंगल के रास्ते से वहां तक पहुंचने का फैसला किया। काफी ऊंचाई से नीचे उतरने के लिए जवानों ने रस्सियों का सहारा लिया और मलबा हटाने का काम शुरू किया।
सुरंग का द्वार पत्थर से बंद हो गया था, जिसे बड़ी मेहनत से तोड़कर आने जाने का रास्ता बनाया गया। हर कोई डर रहा था, क्योंकि चारों तरफ मलबा और कीचड़ भरा था, डिप्टी कमांडेंट नितेश ने सुरंग में जाने का फैसला किया। हमारी कोशिश रंग लाई और शाम साढ़े पांच बजे बारह लोगों को सुरंग से जीवित निकाला गया। इसमें औली के कुछ छात्रों ने भी मदद की जो पर्वतारोहण का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बेटियां अनुशासन के साथ जीवन में आगे बढ़ें
जीवन में आगे बढ़ना है तो अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। बेटियां अब हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। अब ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जहां बेटियां किसी से पीछे हों। मंजिल पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, आराम से बैठकर कुछ भी हासिल नहीं होता है। लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए आगे बढ़ें।
नीरू गर्ग, डीआईजी, गढ़वाल रेंज
- फोटो : अमर उजाला
नीरू गर्ग, डीआईजी, गढ़वाल रेंज
आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग बताती हैं कि आपदा में काम करने का ये उनका पहला अनुभव था। चमोली के तपोवन में आपदा की सूचना मिली थी, लेकिन असल में क्या हुआ है कुछ भी स्पष्ट नहीं था। देहरादून से तपोवन के लिए निकली तो मौके पर मौजूद बचाव दल से संपर्क कर स्थिति का जायजा लेती रही।
घटना स्थल पर पहुंची तो वहां का नजारा वीभत्स था, लगभग सबकुछ खत्म हो गया था, पानी की लहरें बता रही थीं वहां पर क्या हुआ था। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती ये पता करना था कि लोग कहां-कहां पर काम कर रहे थे, उसी हिसाब से राहत और बचाव कार्य की योजना बनानी थी।
जांच पड़ताल के बाद सुरंग में लोगों के फंसे होने का पता चला। बिना देर किए मलबे का ढेर हटाने का सिलसिला शुरू हुआ और लोगों को जीवित निकाला गया।
बेटी की परीक्षा दे रही थी, हम जीवन तलाश रहे थे
मेरी नौ साल की बेटी है, उसकी परीक्षा थी। आपदा में लोगों की जिंदगी बचाने के मिशन में इस कदर जूझ रहे थे कि बेटी को परीक्षा की तैयारी कराना तो दूरउससे बात तक नहीं हो पाती थी।
रात को फोन पर बात होती थी। मैं उससे सिर्फ यही कहती थी कि अच्छे से पढ़ाई करना, हरिद्वार में मां ने बेटी का ध्यान रखा। दिन-रात जिंदगियों की तलाश में भटकते थे। अभियान के दौरान कई शव भी बरामद किए गए जो पहाड़ से आई आफत में कई फुट नीचे दबे हुए थे।
जो भी काम करें, दिल से करें
लड़कियों के लिए हर क्षेत्र में काम करने के पूरे अवसर हैं। अपनी रुचि को पहचानें और उस क्षेत्र में आगे बढ़े। क्षेत्र कोई भी हो दिल से काम करें, दुनिया आपका सम्मान करेगी। हिम्मत ही आपको बहुत आगे लेकर जाएगी।
रिद्धिम अग्रवाल, डीआईजी, एसडीआरएफ
- फोटो : अमर उजाला
रिद्धिम अग्रवाल, डीआईजी, एसडीआरएफ, उत्तराखंड
रिद्धिम 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। जब उन्हें आपदा की सूचना मिली तो सबसे पहले वे कंट्रोल रूम पहुंचीं। प्राथमिक सूचना के आधार पर कम से कम समय में राहत और बचाव कार्य की रूपरेखा तैयार की, क्योंकि पहला मकसद आपदा में फंसी जिंदगियां बचाना था। मौके पर काम कर रही टीम को जरूरी संसाधन मुहैया करवाए गए। टीमों में समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से मिशन को अंजाम दिया गया जिससे कई जीवन बचाए गए।
जोखिम लेकर पूरी टीम ने किया काम
पानी से खतरा बना हुआ था, इसके बावजूद टीम ने जोखिम लेकर बचाव अभियान शुरू किया ताकि अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सके। साथ ही दूसरे जिलों को अलर्ट किया, ताकि वहां की आबादी को कोई नुकसान न हो।
टीम की भूख-प्यास सब खत्म हो गई थी, जहां-तहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का जूनुन था। घटनास्थल पर अपनों की तलाश में जुटे लोगों की पीड़ा और माथे पर चिंता की लकीरें थीं, पर हम इस प्राकृतिक आपदा के सामने हार मानने को तैयार नहीं थे।
इच्छा शक्ति से हर सपना होगा साकार
लड़कियां जो आईपीएस बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं उनके लिए मेरा यही संदेश है, दृढ़ इच्छाशक्ति से हर सपना साकार होता है। जीवन में संतुलन बनाकर चलना अच्छी बात है, लेकिन विपरीत परिस्थति में प्राथमिकता तय करनी चाहिए। मेरी यही सलाह है कि हिम्मत से हर काम संभव है।