'प्रेगनेंसी को बीमारी जैसा न समझें'
डॉक्टर दीप्ति गर्भवती महिलाओं की सफल और स्वस्थ नॉर्मल डिलीवरी के प्रयास में रहती हैं। इस बारे में वह बताती हैं, सबसे जरूरी है कि प्रेगनेंसी नॉर्मल हो। आजकल के वातावरण में लोगों ने गर्भावस्था को ही बीमारी बना दिया है। अगर कोई महिला गर्भवती है तो कहा जाता है कि घर के काम मत करो, ऑफिस जाना बंद कर दो, ट्रेन में सफर मत करो।
गर्भावस्था सामान्य स्थिति है, उसे बीमारी नहीं समझना चाहिए। गर्भावस्था में अपने रोजमर्रा के काम कीजिए, जब डिलीवरी का समय आए तो इसे एक सामान्य प्रक्रिया समझें, ताकि डिलीवरी भी सामान्य तरीके से हो सके।
गर्भावस्था शारीरिक प्रक्रिया और मानसिक परीक्षा
नार्मल डिलीवरी के लिए प्रोत्साहित करते हुए डॉक्टर दीप्ति ने सलाह दी कि सबसे जरूरी है कि गर्भावस्था में अपना माइंड सेट सही रखें।
डिलीवरी एक शारीरिक प्रक्रिया तो है ही साथ ही महिला की मानसिक परीक्षा भी है। इसके लिए तैयार रहें।
- घर पर बड़े और अनुभवी लोगों से बात करें। गूगल या यूट्यूब के भरोसे न रहें।
- जितना हो सके सक्रिय रहना बेहतर होता है। वजन नहीं बढ़ने देना चाहिए। नॉर्मल प्रेगनेंसी में महिलाओं का 10 से 12 किलो वजन बढ़ जाता है, लेकिन इससे ज्यादा वजन न बढ़ने दें।
- अपने डॉक्टर से प्रेगनेंसी के बारे में अच्छे से बात करें। कई बार सिजेरियन की जरूरत न होते हुए भी, कर दिए जाते हैं। ऐसे में अपने डॉक्टर से सवाल करने में झिझक महसूस न करें।
- मुख्य तौर पर महिलाओं को दर्द से डर लगता है। दर्द को कम करने के लिए अब बहुत सारे उपाय हैं। इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर से दर्द को कम करने के उपायों के बारे में जानें।
सिजेरियन से होने वाली दिक्कतें
सिजेरियन यानी ऑपरेशन के बाद जन्मे शिशुओं में कई बार थोड़ी सी सांस लेने की दिक्कत देखने को मिलती है। इसे मेडिकल भाषा में 'Transient tachypnea of the newborn' कहते हैं।
कई स्टडी ऐसी आई हैं, जिसमें बताया गया है कि नार्मल डिलीवरी से जो बच्चे पैदा होते हैं, उनका इम्यून सिस्टम सिजेरियन से जन्मे बच्चों की तुलना में ज्यादा बेहतर होता है।
सिजेरियन के बाद महिला को रिकवरी में भी समय लगता है। वहीं अगर पहली डिलीवरी सिजेरियन से हुई है तो दूसरी डिलीवरी भी सिजेरियन से होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि अगर कोई मेडिकल कॉम्प्लीकेशन है तो बिल्कुल सिजेरियन कराना चाहिए।
प्री-प्रेगनेंसी काउंसलिंग बहुत जरूरी
डॉक्टर दीप्ति बताती हैं कि जो कपल फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, उनके लिए प्री-प्रेगनेंसी काउंसलिंग बहुत जरूरी है। वह अक्सर अपने मरीजों को समझाती हैं कि जैसे नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी या किसी परीक्षा से पहले की तैयारी करके जाते हैं, वैसे ही प्रेगनेंसी हमारे जीवन की बहुत बड़ी परीक्षा है, उसके लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए।
प्री-प्रेगनेंसी काउंसलिंग से परेशान होने की जरूरत नहीं, इसमें आपके कुछ बेसिक से ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं, ये जानने के लिए कि आपका स्वास्थ्य सही है या नहीं, और कोई ऐसी परेशानी तो नहीं जो आपसे बच्चे में ट्रांसफर हो सकती है। इसके बाद कुछ बेसिक सी दवाइयां डॉक्टर आपको लिख कर देंगे। यह एक अच्छी प्रेगनेंसी के लिए बहुत जरूरी होती है।
सिर्फ गर्भावस्था में ही नहीं, जब जरूरत हो तब डाॅक्टर के पास जाएं
महिला स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए डॉक्टर दीप्ति कहती हैं कि महिलाएं खुलकर अपनी परेशानी ही नहीं बता पातीं। कई बार महिला मरीज के साथ आए परिजन बताते हैं कि उन्हें समस्या क्या है। वहीं जब तक महिला गर्भवती न हो या उसकी तबीयत बहुत अधिक बिगड़ न जाए, महिलाओं की ओर कोई ध्यान ही नहीं देता। यह भी एक वजह है कि उन्होंने महिला स्वास्थ्य पर काम करने के लिए चुना।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉक्टर दीप्ति ने इस साल बजट सत्र 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए सभी महिलाओं को सोचने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर महिला स्वस्थ है तो ही वह अपने परिवार का ध्यान रख सकती है।
केवल गर्भवती होने पर ही उन्हें डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहिए। बल्कि गर्भावस्था से पहले, प्रसव के बाद और जब भी उन्हें डॉक्टर की जरूरत महसूस हो तो जरूर जाएं क्योंकि सही मायने में एक परिवार का मुखिया उनकी महिलाएं ही होती हैं।
जीवन परिचय और शिक्षा
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी दीप्ति के पिता पेशे से इंजीनियर और मां गृहणी हैं। परिवार में शुरू से बच्चों को खुद से मेहनत करके भविष्य में कुछ बनने की सीख दी गई। दीप्ति के बड़े भाई ने आईआईटी से इंजीनियरिंग की और बाद में आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया। बड़ी बहन ने भी इंजीनियरिंग की। भाई और बहन की तरह इंजीनियरिंग से अलग दीप्ति ने डॉक्टर बनने की राह चुनी। उनके डॉक्टर बनने के पीछे भी खास वजह थी।
डॉक्टर दीप्ति बताती हैं कि ये ख्वाब दो पीढ़ियों से चला आ रहा था। उनके नाना जी चाहते थे कि उनकी बेटी यानी दीप्ति की मां डाक्टर बनें, हालांकि यह संभव न हो सका। मां ने कोशिश की लेकिन लैब में मेंढक को देखकर घबरा गईं। बाद में नाना के सपने और मां की इच्छा को दीप्ति ने पूरा किया।
बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना लिए उन्होंने भोपाल से अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की। बाद में पीएमटी की परीक्षा पास कर नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। यहां से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पीजी एंट्रेंस की तैयारी की और इंदौर के एमजी मेडिकल कॉलेज से गाइनी में एमएस किया।
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