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International Women Day 2022: साड़ी पहनकर उड़ान भरने वाली पहली भारतीय महिला पायलट की कहानी है रोचक

Tue, 08 Mar 2022 12:13 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिला दिवस 2022- सरला ठकराल - फोटो : facebook/GloriousIndian
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हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को लेकर समाज को जागरूक किया जाता है। दुनियाभर में महिलाओं को समाज में समान सम्मान दिलाने के लिए महिला दिवस के मौके पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में महिला दिवस के मौके पर हम उन भारतीय महिलाओं के योगदान को याद करेंगे तो समाज के लिए एक मिसाल बन गईं। आज भारत में कई महिला पायलट हैं जो विमान से लेकर फाइटर जेट तक उड़ाती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली महिला पायलट कौन हैं, जिन्होंने साड़ी पहनकर हवाई जहाज उड़ाया था? चलिए जानते हैं अदम्य साहस का परिचय देने वाली पहली भारतीय महिला पायलट सरला ठकराल के बारे में।

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सरला ठकराल का जीवन परिचय

सरला ठकराल का जन्म 8 अगस्त 1914 में ब्रिटिश भारत में हुआ था। जब सरला 16 साल की थीं, तभी उनका विवाहर पीडी शर्मा से हो गया था, जोकि एक प्रशिक्षित पायलट थे। सरला को उनके पति ने उड़ान भरने को लेकर प्रोत्साहित किया। जिसके कारण शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां होने पर भी सरला ने अपने सपनों को जिंदा रखा।

सरला ठकराल को मिला ससुराल का साथ

सरला ठकराल के पति के अलावा उनके ससुराल में 9 सदस्य पायलट थे। सरला के पति को पहले भारतीय एयर मेल पायलट का लाइसेंस मिला था। वह कराची से लाहौर के बीच की उड़ान भरते थे। सरला ठकराल भी लाहौर फ्लाइंग क्लब की सदस्य रहीं। जब सरला की ट्रेनिंग पूरी हो गई और आवश्यक उड़ान के घंटे पूरे हो गए, तो उनके प्रशिक्षक चाहते थे कि सरला सोलो उड़ान भरें। उनके साथ के किसी भी सदस्य को इस बात से आपत्ति नहीं थी, केवल फ्लाइंग क्लब के एक क्लर्क को छोड़कर।
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'ए लाइसेंस' प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला

सरला ठकराल एक हजार घंटे की उड़ान पूरा करने वाली पहली ए लाइसेंस प्राप्त भारतीय महिला भी थीं। सरला के ससुर ने भी उनका साथ दिया लेकिन बाद में 1939 में जब सरला कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए मेहनत कर रही थी, तभी दूसरे विश्व युद्ध के कारण उनकी ट्रेनिंग बीच में ही रोकनी पड़ी।

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सरला ठकराल की भारत वापसी

इस दौरान एक विमान हादसे में सरला ठकराल के पति की मौत हो गई। सरला उस समय महज 24 साल की थीं। इस घटना के बाद उन्होंने पायलट बनने के सपने को छोड़ दिया और भारत वापस आ गईं। यहां उन्होंने मेयो स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया और पेंटिंग सीखने के साथ ही फाइन आर्ट में डिप्लोमा हासिल किया।

उद्यमी के रूप में सरला ठकराल 

1947 में जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो सरला अपनी दोनों बेटियों के साथ दिल्ली आकर रहने लगीं। एक साल बाद उन्होंने पीपी ठकराल नाम के व्यक्ति से शादी कर ली।  सरला ने अपने जीवन की नई शुरुआत करते हुए कपड़े और गहने डिजाइन करने की दिशा में कदम रखा और लगभग 20 साल तक कुटीर उद्योगों से जुड़ी रहीं। देश की होनहार महिला पायलट ने एक व्यवसायी के रोल को भी बखूबी निभाया। 15 मार्च 2008 में उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी उपलब्धि, साहस और संघर्ष की कहानी हर महिला के लिए प्रेरणा बन गई। 
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