दुनियाभर में आज महिला दिवस मनाया जा रहा है। महिलाओं की स्थिति में भले ही सुधार हुआ है लेकिन महिलाएं आज भी आत्मनिर्भर नहीं हो सकी हैं। आर्थिक स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। देश की अधिकतर महिलाएं आज भी रुपये पैसों के मामले में पति या घर के पुरुषों पर निर्भर रहती हैं।
महिलाओं को स्मार्ट इंवेस्टर प्रोग्राम के बारे में शिक्षित करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अमर उजाला और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड की ओर से महिला दिवस के मौके पर
'आत्मनिर्भर स्त्री: आजादी का सच्चा अमृत महोत्सव' वेबिनार का आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन आयोजन को डाॅ मुनीश सभरवाल, निवेश बैंकर, निजी इक्विटी, एम एंड ए सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, आईएसबी और इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर के एल्युमिनी ने होस्ट किया। वहीं फिनसेफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक मृण अग्रवाल बतौर विशेषज्ञ शामिल हुईं। मृण अग्रवाल ने महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने वाले निवेश प्लान और पूंजी बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी।
मुनीश सभरवाल ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि महिलाओं को एक स्तर तक ले जाने के लिए हम सब को योगदान देने की जरूरत है। वहीं मृण अग्रवाल को फाइनेंस शिक्षा में करीब 25 साल का अनुभव है। डेढ लाख लोगों को उन्होंने शिक्षा प्रदान की है ताकि वह आत्मनिर्भर हो सकें। ग्लोबल जेंडर गैप पर हुई स्टडी के मुताबिक, भारत की रैंक 155 है। भारत की स्त्रियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए देश को काफी प्रयास की जरूरत है। इसके बाद मुनीश सभरवाल ने मृण अग्रवाल से कुछ सवाल किए, जिसके जवाब महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने का मार्ग बताते हैं।
आत्मनिर्भर स्त्री कौन होती है?
मृण अग्रवाल ने आत्मनिर्भर स्त्री की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर स्त्री वह होती है जो अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जी सकती है। कहां रहना है, क्या करियर चुनना है, इन सब के बारे में वह अपने हिसाब से तय कर सकती है। पिछले कई सालों से देख रहे हैं कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पहले महिलाओं के पास करियर को लेकर कुछ ही विकल्प हुआ करते थे पर आज उनके पास कई विकल्प भी हैं और वह अपने क्षेत्र में तरक्की भी कर रही हैं।
शहरों में तो आत्मनिर्भरता बढ़ी हैं लेकिन गांवों में आत्मनिर्भर महिला की व्याख्या क्या है?
गांवों की महिलाओं की आत्मनिर्भरता शहरों की तुलना में कम ही रहेगी। लेकिन आज कल लड़कियां ज्यादा पढ़ रही हैं। इसका अर्थ है कि वह अपना और अपने परिवार को संभालने के लायक बन रही हैं, उनकी मदद कर सकती हैं। पर अभी भी काफी तरक्की होनी बाकि है। छोटे शहरों और गांवों में और अधिक काम की जरूरत है।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता स्त्रियों के लिए क्यों जरूरी है?
आजकल महिलाएं करियर के हिसाब से आत्मनिर्भर है लेकिन आर्थिक रूप से स्त्री आज भी आत्मनिर्भर नहीं है। ज्यादातर औरतों को लगता है कि पैसे संभालने का काम आदमी अच्छा करते हैं। इस मामले में वह दूसरों पर निर्भर हैं। आर्थिक तौर पर उन्हें आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। आर्थिक आत्मनिर्भर महिला खुद के साथ परिवार को भी संभाल सकती है।