Bianca Kuttickattu: बियांका कुट्टीकट्टू एक भारतीय महिला हैं जिन्होंने बड़े फैशन ब्रांड्स को छोड़कर कांथा जैकेट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया और एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल को देखने से ही स्पष्ट हो जाता है कि कला के प्रति उनका झुकाव काफी गहरा है। बियांका को रचनात्मक माहौल में पाला गया था, जहां उनकी मां एक नर्तकी थीं और उनके सौतेले पिता एक अभिनेता-निर्देशक थे। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी बियांका को विविध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध परवरिश मिली, जिसने उनके करियर को सेलीन, एक्ने और मैसन मार्जीला जैसे प्रतिष्ठित फैशन हाउस की ओर निर्देशित किया।
बियांका नामाई नाम के लेबल की संस्थापक
न्यूयॉर्क स्थित लेबल 'नामाई' की संस्थापक बियांका ने अपने करियर के अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए खुद के लेबल की शुरुआत की। बचपन से ही बियांका की कला और डिजाइन में रुचि रही है। ईस्टर पर अपने भाई-बहनों के साथ अंडे सजाने से लेकर सर्दियो की रातों में टिशू पेपर से लालटेन बनाने तक, उनके बचपन की यादें रचनात्मकता से भरी थीं।
बचपन से कपड़े डिजाइन करने का शौक
किशोरावस्था में वे पुरानी दुकानों से कपड़े खरीदकर खुद के लिए नए ट्रेंड तैयार करने लगी थीं और अपनी मां की सिलाई मशीन पर काम करना सीख रही थीं। यहां तक कि वे पुरानी जैकेटों को रजाई में बदलने लगीं, जिससे उनके भीतर अवचेतन रूप से अपसाइक्लिंग के प्रति जुनून पनपने लगा।
फैशन को बनाया पेशा
फैशन का पेशेवर अध्ययन उनके लिए स्वाभाविक था। लंदन कॉलेज ऑफ फैशन और मिडिलसेक्स विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद, बियांका ने लंदन में एक डिजाइनर के रूप में करियर की शुरुआत की। हालांकि, उनके करियर में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने पेरिस के इंस्टीट्यूट फ्रैंकोइस डे ला मोड से मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसने उन्हें जीन पॉल गॉल्टियर, कार्ल लेगरफेल्ड और रेपेटो जैसे दिग्गज डिजाइनरों के साथ काम करने का अवसर प्रदान किया। इसके अलावा, उन्होंने फ्रांस के प्रसिद्ध रोमन स्थित रॉबर्ट क्लेरगेरी और चार्ल्स जॉर्डन के कारखानों में फुटवियर डिजाइन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
थ्रिफ्टिंग के शौक ने हुनर को संवारा
बियांका का डिज़ाइन दृष्टिकोण हमेशा अद्वितीय रहा है। वे थ्रिफ्टिंग (पुराने कपड़े खरीदने) की शौकीन थीं और अक्सर इन कपड़ों को नए डिजाइनों में ढालती थीं। उनकी रचनात्मक प्रक्रिया में थ्रिफ्ट स्टोर से कपड़े इकट्ठा करना और उन्हें नए सिरे से डिजाइन करना शामिल था। बियांका का सफर न केवल फैशन की दुनिया में नई ऊंचाइयां छू रहा है, बल्कि यह दिखाता है कि रचनात्मकता और स्थिरता मिलकर कैसे सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं।