15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। इस खास दिन पर एक ऐसी महिला सैन्य अधिकारी के बारे में जानते हैं, जिन्होंने कई नौकरियों को ठुकराकर देश सेवा के लिए सैन्य बल को चुना और कड़ी मेहनत के बाद आर्मी में कैप्टन का पद प्राप्त किया।
भारतीय सेना की अधिकारी सरिया अब्बासी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि मेहनत और समर्पण से किसी भी सपने को पूरा किया जा सकता है। कैप्टन सरिया अब्बासी जैसी महिलाएं भारतीय सेना में एक नई मिसाल कायम कर रही हैं, जो यह साबित करती हैं कि देश की रक्षा में महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। उनका जीवन साहस, दृढ़ता, और देशभक्ति का जीवंत उदाहरण है।
भारतीय सेना में कैप्टन सरिया अब्बासी साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली सरिया अब्बासी ने देश की सेवा के लिए अपने जीवन के आरामदायक विकल्पों को ठुकरा कर भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
सरिया अब्बासी का प्रारंभिक जीवन
सरिया अब्बासी का जन्म एक शिक्षित और प्रगतिशील परिवार में हुआ। उनके पिता डॉ. तहसीन अब्बासी, ऑल इंडिया रेडियो में डायरेक्टर रह चुके हैं, जबकि उनकी मां रेहाना अब्बासी एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य थीं। छोटे भाई ने लंदन से एमबीए की पढ़ाई की है। बचपन से ही सरिया ने भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा का सपना देखा था। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम किया और हर चुनौती को पार किया।
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शिक्षा और आर्मी ज्वाइन करने का सफर
सरिया ने बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें देश और विदेश से आकर्षक नौकरियों के प्रस्ताव मिले। हालांकि, देशभक्ति की भावना और सेना में सेवा करने की प्रेरणा ने उन्हें इन प्रस्तावों को ठुकराने के लिए मजबूर किया।
सेना में भर्ती होने के लिए सरिया ने यूपीएससी की सीडीएस परीक्षा दी। पहले प्रयास में असफलता का सामना करने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने दूसरी बार परीक्षा पास की। उस समय महिलाओं के लिए सेना में केवल 12 सीटें थीं, और सरिया ने इन सीमित स्थानों में अपनी जगह बनाई।
भारतीय सेना में सरिया अब्बासी का योगदान
- साल 2017 में कठिन ट्रेनिंग के बाद सरिया अब्बासी को भारतीय सेना में कमीशन दिया गया। कैप्टन के पद पर तैनात सरिया ने देश के सीमावर्ती इलाकों में अपनी जिम्मेदारी निभाई।
- उन्होंने ड्रोन किलर टीम का नेतृत्व किया और एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर तैनात रहीं।
- वर्तमान में, वह अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में एंटी-एयरक्राफ्ट गन एल 70 के साथ देश की सुरक्षा कर रही हैं।