लेकिन इन क्रांतिकारी महिलाओं के बलिदान से आजाद भारत की महिलाओं ने क्या सीख ली। उनकी दमदार परंपरा को आज की महिलाएं कैसे आगे बढ़ा रही हैं, इसका मूल्यांकन करना भी जरूरी है। आजाद भारत की महिलाओं ने भी अपने देश के मान-सम्मान को बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। स्वतंत्र भारत ने हर क्षेत्र में महिलाओं की ताकत को पहचाना है।
आजादी के बाद कुछ ऐसी महिलाएं उभरी हैं जिन्होंने न सिर्फ समाज की धारा को बदला, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल कायम की। यहां हम बात कर रहे हैं उन 5 बहादुर महिलाओं की जिनकी कहानियां हर लड़की को जाननी चाहिए।
कल्पना चावला
देश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का नाम लिया जाए तो इस सूची की प्रथम श्रेणी में कल्पना चावला का नाम आता है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय महिला हैं। हरियाणा के एक छोटे से शहर से निकलकर कल्पना चावला ने दिखा दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। नासा की अंतरिक्ष यात्री बनकर उन्होंने भारतीय महिलाओं का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
किरण बेदी
किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासनिक सेवा में उच्चतम पद तक महिलाओं के लिए मार्ग खोले। पुरुषों के वर्चस्व वाले पुलिस विभाग में किरण बेदी ने अपनी सख्त छवि और ईमानदारी से न सिर्फ अपराधियों को डराया, बल्कि महिलाओं के लिए नई राह भी खोली। आज सिपाही से लेकर दारोगा और आईपीएस पद तक कई महिला अधिकारियों की भूमिका दमदार हुई है।
बछेंद्री पाल
दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर पर्वत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल हैं। 1984 में बर्फ से ढके एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराकर बछेंद्री पाल ने साबित किया कि हौसले हों तो कोई भी ऊंचाई छूना नामुमकिन नहीं।
मेरी कॉम
बॉक्सिंग रिंग की ‘मैग्नीफिशेंट मैरी’ के नाम से मशहूर मैरी काॅम ने छह बार वर्ल्ड चैंपियन अपने नाम की। मां होने के बावजूद रिंग में दम दिखाने वाली मेरी कॉम ने खेल की दुनिया में महिलाओं की मौजूदगी को मजबूती दी। उन्होंने साबित किया कि महिलाएं शारीरिक क्षमताओं में भी किसी से कम नहीं और बेहतर एथलीट हो सकती हैं जो देश के लिए एक या दो नहीं छह बार विश्व स्तरीय पदक ला सकती हैं।
सुधा मूर्ति
इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति ने न सिर्फ हजारों गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाई, बल्कि सादगी और सेवा से यह दिखाया कि असली हीरो वही होते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं। सुधा मूर्ति समाज सेविका और लेखक हैं। वह भारत की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी टेल्को में नियुक्त पहली महिला इंजीनियर हैं।