दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध में समर्थन के बावजूद अंग्रेज भारत को स्वतंत्र करने के लिए तैयार नहीं हुए तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई। इसे आजादी की अंतिम जंग कह सकते हैं, जिसके बाद ब्रिटिश हुकूमत दहशत में आ गई। इस आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण समेत स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं ने हिस्सा लिया।
भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाओं की भूमिका भी अहम रही। अगस्त क्रांति का हिस्सा बनने वाली पांच महिला आंदोलनकारियों के बारे में भी जानना चाहिए।
अगस्त क्रांति की 5 आंदोलनकारी महिला योद्धा
अरुणा आसफ अली
नमक सत्याग्रह के दिनों से ही अरुणा आसफ अली स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थीं लेकिन उन्हें पहचान 9 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में बनी, जब सभी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने राष्ट्रीय ध्वजारोहण समारोह का नेतृत्व किया। सितंबर 1942 को दिल्ली प्रशासन ने अरुणा आसफ से आत्मसमर्पण के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इस कारण उनका घर, संपत्ति समेत सब कुछ नीलाम कर दिया गया।
मातंगिनी हाजरा
मातंगिनी हाजरा बंगाल के मिदनापुर की रहने वाली थीं। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया। 73 साल की मातंगिनी हाजरा के नेतृत्व में 6 हजार प्रदर्शनकारियों ने तामलुक स्टेशन तक मार्च किया। प्रदर्शन के दौरान जब वह तामलुक में लालबाड़ी पर कब्जा करने गई तो पुलिस गोलीबारी में शहीद हो गईं। उन्होंने भगिनी सेना की स्थापना की थी।
सरोजिनी नायडू
नमक सत्याग्रह के दौरान गांधी जी और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सरोजिनी नायडू ने सत्याग्रहियों का नेतृत्व किया। भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुई और इस दौरान गिरफ्तार होने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थीं। उन्हें पुणे के आगा खां महल में रखा गया था। 10 महीने की जेल के बाद वह रिहा हुई और राजनीति में सक्रिय हुईं। आजादी के बाद वह उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। मार्च 1949 में अपने कार्यकाल के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई।
मीराबेन
मैडलिन स्लेड नाम की महिला ब्रिटेन के कुलीन परिवार से ताल्लुक रखती थी। गांधी जी से प्रभावित होकर वह भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं। नाम बदला तो मीराबेन के नाम से पहचान मिली। वह गांधी जी के साथ हर आंदोलन में शामिल हुईं। खादी के प्रचार के लिए पूरे देश की यात्रा की। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मीराबेन गांधी जी के साथ गिरफ्तार हुईं। 21 महीने तक कैद रहीं। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रो मोर फूड अभियान की सलाहकार बनीं।
सुचेता कृपलानी
लिया और जेल गईं। 1943 में जब कांग्रेस में महिला विभाग की स्थापना हुआ तो सुचेता कृपलानी को सचिव बनाया गया। स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश की विधानसभा सदस्य और बाद में लोकसभा सदस्य बनीं। 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव उन्हें मिला।
इसके अलावा सुशीला नायर, उषा मेहता, कमला देवी चट्टोपाध्याय, पूर्णिमा बनर्जी, कनकलता बरुआ और तारा रानी श्रीवास्तव समेत कई महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी इस लिस्ट में शामिल हैं।