Inayat Vats News in Hindi: देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात सैनिक न तो अपने परिवार की और न ही जान की परवाह नहीं करते हैं। सैनिक जितने साहसी होते हैं, उनका परिवार उससे अधिक मजबूत होता है। किसी के पिता, तो किसी के पति देश की रक्षा के लिए शहीद हो जाते हैं। ऐसी ही एक बेटी ने अपने पिता को आतंकवाद विरोधी अभियान में खो दिया लेकिन उस बेटी ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने की ठान ली और खुद भी सेना में शामिल हो गई। आज यह बेटी इस परिवार की तीसरी पीढ़ी है, जो देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती हुई है। देश की इस बेटी का नाम इनायत वत्स है। आइए जानते हैं इनायत वत्स की कहानी।
शहीद मेजर की बेटी हैं इनायत वत्स
इनायत वत्स हरियाणा के पंचकूला की रहने वाली हैं। इनायत अपने माता पिता की इकलौती बेटी हैं। इनायत के पिता का नाम नवनीत वत्स है जो कि सेना में मेजर के पद पर कार्यरत थे। जब इनायत महज ढाई साल की थीं, तब 2003 में मेजर नवनीत वत्स ने जम्मू कश्मीर के एक आतंकवाद विरोधी अभियान में जान गवां दी थी। इनायत वत्स के पिता को मरणोपरांत सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इनायत के नाना भी फौज में कर्नल थे।
ढाई साल की उम्र में इनायत ने पिता को खोया
20 साल पहले अपने पिता को खो चुकी इनायत ने अपने पिता की विरासत को जारी रखने का फैसला लिया और भारतीय सेना में शामिल हो गईं। अप्रैल में इनायत चेन्नई में स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में शामिल होने वाली हैं।
इनायत वत्स की शिक्षा
इनायत वत्स ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया और बाद में डीयू के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया। इनायत को शहीदों के परिजनों के लिए राज्य की नीति के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति मिल सकती हैं, लेकिन उन्हें पिता की तरह ही सेना में भर्ती होना था। इनायत की मां और उनके परिवार ने भी इस फैसले में उनका साथ दिया।
शहीद मेजर नवनीत वत्स और शिवानी की शादी को महज चार साल हुए थे जब वह शहीद हो गए थे। शिवानी उस समय सिर्फ 27 साल की थीं। उसके बाद वह चंडीमंदिर में एक आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका के तौर पर कार्य करने लगीं।