भारत की प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए हर साल लाखों अभ्यर्थी परीक्षा देते हैं। आईएएस बनने का सपना लिए परीक्षा पास करने के लिए मेहनत करते हैं लेकिन सफलता कुछ ही अभ्यर्थियों को मिलती है। हालांकि कुछ अभ्यर्थी प्रयास जारी रखते हैं। अगले साल फिर अधिक तैयारी के साथ परीक्षा देते हैं। ऐसे ही आईएएस बनने का सपना एक लड़की ने भी देखा था। सपने को सच करने के लिए उसने अपनी नौकरी तक छोड़ दी। यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन प्री एक्जाम भी पास न हो सकी। फिर से प्रयास किया, पर निराशा ही हाथ लगी। तीसरी बार फिर परीक्षा में अधिक तैयारी के साथ आई लेकिन एक बार फिर विफल हो गई। एक दो या तीन नहीं बल्कि पांच बार ये लड़की नाकाम रही। बार बार फेल होने पर जब लोग उम्मीद हार जाते हैं तो इस लड़की ने अपने आईएएस बनने के सपने को जुनून बना दिया और अंत में जीत जज्बे, सपने और जुनून की हुई। संघर्ष की ये कहानी है आईएएस नमिता शर्मा की। चलिए जानते हैं कौन हैं आईएएस नमिता शर्मा, जिन्होंने पांच बार फेल होने के बाद चढ़ी सफलता की सीढ़ी।
कौन हैं नमिता शर्मा
नमिता शर्मा दिल्ली की निवासी हैं। नमिता के पिता दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हैं और मां गृहणी हैं। नमिता के परिवार में माता पिता के अलावा एक भाई भी है। परिवार ने हमेशा नमिता का हौसला बढ़ाया। नमिता की शुरुआती शिक्षा दिल्ली में ही संपन्न हुई जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के ही आईपी यूनिवर्सिटी से बीटेक कर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। नमिता की कैंपस सेलेक्शन में नौकरी लग गई। जिसके बाद उन्होंने आईबीएम में जॉब करना शुरू किया।
इंजीनियर की जॉब छोड़ की यूपीएससी की तैयारी
लेकिन नमिता अपनी जाॅब से संतुष्ट नहीं थीं। उन्हें तो प्रशासनिक सेवा में जाना था। इसलिए दो साल मुंबई में जॉब करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ कर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया। लेकिन नमिता की मंजिल आसान नहीं थी। लगातार चार बार प्री परीक्षा में नमिता असफल रहीं। इसके बाद भी नमिता ने हौसला बनाए रखा।
यूपीएससी परीक्षा में लगातार पांच बार हुईं फेल
पांचवी बार नमिता ने फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गईं। लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया तो उन्हें फिर निराशा ही हाथ लगी। ये किसी व्यक्ति का दृढ़ संकल्प या जज्बा ही हो सकता है कि बार बार हार के बाद भी मन से हार न माने। उन्होंने एक बार फिर परीक्षा दी और इस बार नमिता ने ऑल इंडिया रैंक 145 प्राप्त किए और आखिरकार उनका आईएएस अफसर बनने का सपना पूरा हो गया।