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Himanshi Tokas: भारत की जूडो क्वीन, हिमांशी टोकस ने रचा नया इतिहास

Fri, 03 Oct 2025 11:13 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Judoka World No 1 Ranking: दिल्ली की युवा खिलाड़ी हिमांशी टोकस ने जूडो की दुनिया में ऐसा ही इतिहास रचा है। वह भारत की पहली जूडोका (महिला या पुरुष) हैं जिन्होंने जूनियर कैटेगरी में World No.1 रैंकिंग हासिल की। महज 20 साल की उम्र में यह उपलब्धि पाना अपने आप में असाधारण है।

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हिमांशी टोकस - फोटो : instagram
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विस्तार
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Himanshi Tokas:भारत में जब भी कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर इतिहास रचता है, तो वह न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि होती है बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण होता है। दिल्ली की युवा खिलाड़ी हिमांशी टोकस ने जूडो की दुनिया में ऐसा ही इतिहास रचा है। वह भारत की पहली जूडोका (महिला या पुरुष) हैं जिन्होंने जूनियर कैटेगरी में World No.1 रैंकिंग हासिल की। महज 20 साल की उम्र में यह उपलब्धि पाना अपने आप में असाधारण है।

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हिमांशी का जीवन परिचय 

हिमांशी टोकस का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। बचपन से ही वह खेलों में सक्रिय रहीं। उन्होंने जूडो को न सिर्फ फिटनेस के लिए चुना, बल्कि जल्द ही यह उनका पैशन और करियर बन गया। कठिन ट्रेनिंग और निरंतर मेहनत ने उन्हें बहुत कम समय में राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा दिया।

हिमांशी की उपलब्धियां

एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। हिमांशी ने कैसेबैलंसा एफरिकन ओपन और तेपाई जुनियर एशियन कप जैसी प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड मेडल जीते। अब तक उनके नाम 5 अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक दर्ज हैं, जिनमें एक कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप, तीन कॉन्टिनेंटल कप और एक कॉन्टिनेंटल ओपन शामिल है। इन जीतों के दम पर इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन (IJF) की रैंकिंग में उन्होंने जूनियर कैटेगरी में World No.1 स्थान हासिल किया। सीनियर कैटेगरी में भी वह अब तेजी से टॉप रैंक की ओर बढ़ रही हैं।
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जूडो भारत का मुख्यधारा खेल नहीं है, लेकिन हिमांशी ने संसाधनों और अवसरों की कमी को कभी बाधा नहीं बनने दिया। कठिन ट्रेनिंग सेशन्स, विदेशों में कैंप्स और लगातार टूर्नामेंट खेलते हुए उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

हिमांशी का लक्ष्य

हिमांशी टोकस का World No.1 बनना सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए भी ऐतिहासिक पल है। यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा कि भारत भी जूडो जैसे खेल में विश्व स्तर पर छाप छोड़ सकता है। अब उनकी नजरें ओलंपिक पदक पर हैं, और पूरा देश उनसे नई उम्मीदें लगाए बैठा है। हिमांशी टोकस ने यह दिखा दिया है कि उम्र और परिस्थितियां सफलता के रास्ते में कभी रुकावट नहीं बनतीं। उनकी मेहनत, जुनून और जज़्बे ने भारत का नाम जूडो की दुनिया में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया है। आने वाले समय में उनका सफर और भी गौरवपूर्ण होने वाला है।

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