एम. विश्वेश्वरैया के आदर्शों से प्रेरणा लेकर कई युवाओं ने इंजीनियर बनने का सपना देखा। इनमें से एक प्रेरणादायक नाम अय्योलासोमायाजुला ललिता, यानी ए. ललिता का है, जो भारत की पहली महिला इंजीनियर बनीं। उनके संघर्ष और समर्पण से लाखों महिलाएं आज इंजीनियर बनकर देश का गौरव बढ़ा रही हैं।
देश की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता का प्रेरणादायक सफर
ए. ललिता का जन्म 27 अगस्त 1919 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता, पप्पू सुब्बा राव, एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शिक्षक थे। ललिता अपने सात भाई-बहनों में पांचवें स्थान पर थीं। उस दौर में लड़कियों की शिक्षा पर कम ध्यान दिया जाता था और कम उम्र में ही उनकी शादी करा दी जाती थी। ललिता की भी 15 साल की उम्र में शादी हो गई थी, जबकि उनके तीनों भाई इंजीनियर थे।
कम उम्र में किया कठिनाइयों का सामना
18 साल की उम्र में ललिता ने एक बेटी को जन्म दिया। लेकिन उनके जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब बेटी के जन्म के चार महीने बाद उनके पति का निधन हो गया। इस मुश्किल समय में, उनके पिता ने उन्हें ससुराल से वापस बुलाया और उनका साथ दिया।
इंजीनियरिंग की दुनिया में कैसे रखा कदम
ललिता ने खुद और अपनी बेटी के भविष्य को संवारने का दृढ़ संकल्प लिया। उस समय, इंजीनियरिंग कॉलेजों में लड़कियों के लिए सुविधाएं न के बराबर थीं, लेकिन परिवार के समर्थन से ललिता ने मद्रास कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। 1943 में उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और भारत की पहली महिला इंजीनियर बन गईं।
व्यावसायिक जीवन और उपलब्धियां
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ललिता ने बिहार के जमालपुर में रेलवे वर्कशॉप में काम किया। इसके बाद उन्होंने शिमला में सेंट्रल स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया में इंजीनियरिंग असिस्टेंट के पद पर काम किया। उन्होंने यूके के लंदन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स से ग्रेजुएटशिप की परीक्षा पास की और अपने पिता के साथ रिसर्च कार्यों में जुट गईं।
भाखड़ा नांगल बांध और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स
ललिता ने भाखड़ा नांगल बांध के लिए जनरेटर प्रोजेक्ट पर काम किया। इसके अलावा, वह ट्रांसमिशन लाइनों के डिजाइन, बार प्रोटेक्टिव गियर, सब-स्टेशन लेआउट और अन्य तकनीकी कार्यों में माहिर थीं।
प्रेरणादायक विरासत
60 साल की उम्र में, 1979 में ए. ललिता का निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, साहस, और सफलता की एक मिसाल है। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने आज लाखों महिलाओं को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी है।