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Simran Bala: CRPF की पुरुष टुकड़ी नारी शक्ति के हाथ में, कर्तव्य पथ पर सिमरन बाला का सशक्त प्रदर्शन

Mon, 26 Jan 2026 02:06 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CRPF Officer Simran Bala: सीआरपीएफ की एक महिला अधिकारी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर पुरुष मार्चिंग दल का नेतृत्व करते हुए इतिहास रच दिया हैं। इस महिला अधिकारी का नाम सिमरन बाला है।
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सिमरन बाला - फोटो : Amar ujal
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विस्तार
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CRPF Simran Bala: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भारत की ताकत, अनुशासन और एकता की झलक दिखाई दी। इस गौरवशाली मौके पर सीआरपीएफ की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। सिमरन बाला पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें CRPF की पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने का अवसर मिला। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिला नेतृत्व की मजबूत घोषणा है।

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नारी शक्ति वंदन की मिसाल

सिमरन बाला सिर्फ एक अधिकारी नहीं, एक विचार हैं जो बताता है कि भारत बदल रहा है। गणतंत्र दिवस 2026 पर उनके कदमताल करने के साथ, देश की हर बेटी के भीतर यह विश्वास और मजबूत हुआ कि सुरक्षा बलों का नेतृत्व और कमान एक महिला कितने दमदार तरीके से निभा सकती हैं। आइए जानते हैं सिमरन बाला के बारे में।


कौन हैं सिमरन बाला? 

  • सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से ताल्लुक रखती हैं।
  • सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे।
  • पढ़ाई में शुरू से ही मेहनती रहीं सिमरन ने राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
  • इसके बाद UPSC CAPF परीक्षा में सफलता हासिल कर सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट बनीं। 

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सिमरन की ऐतिहासिक उपलब्धि

  • गणतंत्र दिवस परेड में सिमरन बाला को 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी की कमान सौंपी गई है।
  • यह पहली बार है जब CRPF की किसी पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व कोई महिला अधिकारी करेगी।

प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता

CRPF अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सिमरन बाला ने अनुशासन, नेतृत्व कौशल, शारीरिक क्षमता और आत्मविश्वास में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने यह साबित किया कि नेतृत्व लिंग से नहीं, क्षमता से तय होता है।

महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल

सिमरन बाला की यह उपलब्धि उस सोच को तोड़ती है जिसमें सुरक्षा बलों को केवल पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है। उनका नेतृत्व यह संदेश देता है कि

  • महिलाएं केवल भागीदारी नहीं, नेतृत्व भी कर सकती हैं
  • अवसर मिलने पर महिलाएं हर मोर्चे पर खुद को साबित कर सकती हैं
  • यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता आसान करेगा।
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