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Corinne Mulholland: ऑस्ट्रेलियाई सीनेट में चमकी मातृत्व की शक्ति, जानिए कोरिन मुलहोलैंड की प्रेरणादायक कहानी

Tue, 29 Jul 2025 05:16 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Corinne Mulholland: ऑस्ट्रेलिया की महिला सांसद कोरिन मुलहोलैंड ने अपने नवजात बेटे ऑगी को गोद में लेकर संसद में अपना पहला भाषण दिया। ये नजारा सिर्फ एक भावनात्मक पल नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि मातृत्व और नेतृत्व एक साथ चल सकते हैं।
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कोरिन मुलहोलैंड - फोटो : Instagram
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विस्तार
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Corinne Mulholland: राजनीति का मंच आमतौर पर गंभीर भाषणों, जनता के मुद्दों और अधिकारों की बातों से भरा होता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की नई महिला सीनेटर कॉरिन मुलहॉलैंड ने हाल ही में कुछ ऐसा किया जो न सिर्फ संसद के इतिहास में दर्ज हुआ, बल्कि पूरी दुनिया की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया। अपने नवजात बेटे ऑगी को गोद में लेकर उन्होंने अपना पहला भाषण (Maiden Speech) दिया। ये नजारा सिर्फ एक भावनात्मक पल नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि मातृत्व और नेतृत्व एक साथ चल सकते हैं।

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कौन हैं कॉरिन मुलहॉलैंड?

कॉरिन मूल रूप से क्वींसलैंड की रहने वाली हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की और फिर ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी से लॉ में डिग्री लेकर सुप्रीम कोर्ट ऑफ क्वींसलैंड में प्रैक्टिस की। वह आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ भी हैं, जिन्होंने कम्युनिटी-सेफ्टी प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। साल 2025 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी (ALP) की ओर से क्वींसलैंड से सीनेट में चुना गया।


जब संसद में गूंजा ‘मां का नेतृत्व’

कॉरिन जब अपने नवजात बेटे को गोद में लेकर सीनेट में पहुंचीं, तो हर आंख उनकी ओर मुड़ गई। लेकिन भाषण में उन्होंने जो बातें कही, वह दिल को छू गईं। काॅरिन ने कहा, यह बच्चा सिर्फ मेरा नहीं, यह उन सभी महिलाओं की आवाज है जो काम और मातृत्व के बीच रोज संतुलन बनाती हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि सरकारें ऐसी हों जो माताओं और परिवारों की जरूरतों को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में कोई महिला “चुनाव” करने को मजबूर न हो कि माँ बने या प्रोफेशनल?
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महिला सशक्तिकरण की असल तस्वीर

कॉरिन का यह कदम बदलाव का प्रतीक है। उनके इस कदम से पता चलता है कि संसद जैसे संस्थानों को भी अब वर्किंग मदर्स फ्रेंडली बनने की ज़रूरत है। उनकी यह झलक उस नई सोच को दर्शाती है, जिसमें ‘माँ’ होना कमजोरी नहीं, बल्कि ताक़त है।


क्यों खास है यह पल पूरी दुनिया के लिए?

यह सिर्फ एक महिला सांसद की बात नहीं है, यह हर उस महिला की आवाज़ है जो ऑफिस जाते समय बच्चे की स्कूल ड्रेस तैयार करती है। यह हर उस पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देता है जो मानता है कि महिलाएं नेतृत्व नहीं कर सकतीं और सबसे अहम बात कि हमारे समाज में नेतृत्व अब सिर्फ सूट-बूट में तैयार प्रोफेशनल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा,  बल्कि गोद में बच्चे को लिए संसद में माइक पर भाषण देती महिला सांसद की मातृत्वता को दर्शा रहा है। 

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