महिलाओं की इच्छाशक्ति और नेतृत्व का बिल्कुल जीता-जागता उदाहरण है छत्तीसगढ़ का ये गांव। जहां पर 1300 की आबादी में एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज नही मिला है। जबकि इस गांव के बगल के गांव कंटेनमेंट जोन घोषित किए जा चुके हैं। बड़े-बड़े शहरों की चिकित्सा व्यवस्था के चरमराने के बाद भी इस गांव के लोग कोरोना की दूसरी लहर आने पर भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। जिसका कारण हैं इनके मन की इच्छाशक्ति और अनुशासन के प्रति ललक।
छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय कोरबा से 23 किलोमीटर दूर बसा है पुरेनाखार गांव। जहां की आबादी करीब 1300 है। गांव की महिला सरपंच ज्ञानेश्वरी तंवर ने ग्रामवासियों की सुरक्षा के लिए गांव में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए। सरपंच का साथ देने का काम करने और लोगों को जागरूक करने की उनकी मुहिम में उनके साथ है गांव की शिक्षिका गुलेश्वरी साहू और मितानिन अनीता यादव। ये तीनों महिलाएं पूरी तैयारी के साथ गांव के लोगों को हर छोटी से छोटी जानकारी से अवगत करा रही हैं और जागरूक कर रही हैं।
इन महिलाओं ने सबसे पहले गांव के बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए और कोरोना से बचने के लिए सावधानियां समझाईं। फिर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को घर से बाहर निकलने पर रोक लगाई। इसके साथ ही सरपंच में कुछ युवकों की टोली बना रखी है जो दिन रात गांव की सरहद पर बाहर से आने-जाने वाले लोगों को पर निगरानी करता है। गांव के लोगों के साथ मिलकर सुरक्षा के लिए जागरूक करना इतना आसान भी नहीं था। क्योंकि पड़ोस की दो पंचायतों में सौ से अधिक लोग संक्रमित थे। ऐसे में उन्हें कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया था। लेकिन ज्ञानेश्वरी देवी के द्वारा गांव के लोगों के लिए बरती गई सतर्कता की तारीफ जिला पंचायत सीईओ भी कर रहे हैं।