स्विट्जरलैंड में पैदा हुईं और पली-बढ़ीं इवा के पिता आंद्रे डी मैडे हंगरी के रहने वाले थे और मां मार्टें हेंट्जेल एक रूसी महिला थीं। इवा के पिता यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्य करते थे। वहीं उनकी मां भी पढाती थीं। हालांकि मां के निधन के बाद उनकी परवरिश पिता ने ही की। मां के गुजर जाने के बाद पिता की लाइब्रेरी में समय बिताने वाली इवा को किताबों में रूचि हो गई। यहीं से उन्होंने भारत की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी किताबों को पढ़ा और उनका रुझान इस ओर हो गया।
1929 में इवा की मुलाकात विक्रम रामजी खानोलकर से हुई। विक्रम इंडियन आर्मी कैडेट के सदस्य थे। वे ब्रिटेन के रॉयल मिलट्री एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए गए थे। इवा रामजी से शादी करना चाहती थीं लेकिन उनके पिता इस बात के लिए तैयार नही थे। लेकिन इवा ने 1932 में भारत आकर रामजी से शादी कर ली और इवा से सावित्री बाई खानोलकर बन गईं। इवा के भारतीय संस्कृति के लगाव और लगन की देन थी कि जल्दी ही उन्होने हिंदी, मराठी और संस्कृत बोलना सीख लिया। भारत के प्राचीन इतिहास की गहन जानकारी के कारण इस मेडल की डिजाइन का प्रस्ताव सावित्री बाई को मिला। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। सावित्री ने महावीर चक्र, वीर चक्र और अशोक चक्र की डिजाइन भी तैयार की थी।