कौन हैं बिहार की सरिता राय?
सरिता राय के पिता शिव शंकर राय बिदुपुर के रहने वाले हैं और सरकारी अधिकारी थे। उन्होंने चौकासन के रहने वाले एडवोकेट रंजीत राय से अपनी बेटी सरिता की शादी 2003 में की थी। 2016 में सरिता ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। हालांकि वकालत करने के बजाय असहाय और गरीब बच्चों की मदद करने का फैसला लिया।
शिक्षा और समाज सेवा की मजबूत नींव
सरिता राय ने पटना लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री और अंग्रेजी में परास्नातक की पढ़ाई की है। शादी के बाद एक समय ऐसा भी आया जब वह कानूनी करियर की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन समाज की जरूरतों ने उनकी राह मोड़ दी। उन्होंने एक एनजीओ की सह-स्थापना की, जो मानव तस्करी, बाल श्रम और बाल अपराध से पीड़ित बच्चों को बचाने, पुनर्वास देने और समाज में फिर से स्थापित करने का कार्य करता है।
हजारों बच्चों को दी मुफ्त शिक्षा
सरिता राय ने अब तक लगभग 2000 हजार से अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की है। इसमें 100 से अधिक बच्चे बाल मजदूर थे, जिन्हें सरिता ने मजदूरी से बाहर निकाल शिक्षा की तरफ मोड़ा। वह केवल पढ़ाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के माता-पिता को भी काउंसलिंग देती हैं कि वे बच्चों को कमाई के लिए न भेजें, बल्कि स्कूल भेजें। उनकी टीम झुग्गियों और स्लम क्षेत्रों में जाकर बच्चों को इकट्ठा करती है, उन्हें शिक्षित करती है और उन्हें स्कूल से जोड़ती है।
प्रेरणा बनीं बिहार की बेटियों के लिए
सरिता का सफर कई चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वह बिहार के सामाजिक बदलाव की एक मजबूत मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि जब किसी महिला के हाथ में कलम और संकल्प दोनों हो, तो वह समाज को बदलने की ताकत रखती है। वह करीब 10 वर्षों से झुग्गी में रहने वाले बच्चों के लिए कार्य कर रही हैं। उनके इस सराहनीय प्रयास के लिए बिहार रत्न सम्मान, राष्ट्रीय समाज गौरव सम्मान 2018 समेत सरिता को दर्जनों प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।