Annie besant Death Anniversary 2024: ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के कई वर्षों तक राज किया। व्यापार के लिए आए ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजा रजवाड़ों की विरासत पर अधिकार जताने की कोशिश की। इस दौरान कई क्रांतिकारियों ने आवाज उठाई और ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया। जिसके बाद हुकूमत ब्रिटिश क्वीन के अधिकार में आ गई। ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड से गवर्नर जनरल और कई अंग्रेज अधिकारियों को भारत भेजा, जिन्होंने अपनी रणनीति और राजनीति से देश को खोखला बनाया। लेकिन इस दौरान कुछ ऐसे विदेशी भी भारत आए, जिन्होंने देश की आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई और भारत का साथ देते हुए आजादी की जंग लड़ी।
भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज शुरू होने से लेकर मंगल पांडे को मौत की सजा सुनाए जाने तक और आखिर में भारत की स्वतंत्रता की जंग के दौरान भी देश का समर्थन करने वालों में कई विदेशियों का नाम शामिल है। इसमें सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रोफेसर सीएफ एंड्रूज और कांग्रेस के संस्थापकों में से एक एओ ह्यूम, जॉर्ज यूल का नाम शामिल है। इन विदेशी लोगों में एक विदेशी महिला का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने वाली इस विदेशी महिला का नाम एनी बेसेंट था, जो कि आयरलैंड की समाज सेविका थीं।
20 सितंबर 2024 को एनी बेसेंट की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इस मौके पर भारत की आजादी के लिए एनी बेसेंट के योगदान को याद किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं एनी बेसेंट के बारे में।
कौन थीं एनी बेसेंट?
लंदन में एक उच्च मध्यम वर्ग परिवार में जन्मीं एनी बेसेंट 1917 में कोलकाता में कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गईं। वह मूल रूप से आयरलैंड की रहने वाली थीं, लेकिन उन विदेशियों में शामिल थीं, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। महिला अधिकार कार्यकर्ता एनी बेसेंट का जन्म 01 अक्तूबर सन 1847 में हुआ था। उनके पिता डाक्टर थे।
बेसेंट 16 नवंबर 1893 को मद्रास के अडयार में थियोसोफिकल सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहली बार भारत आईं और फिर यहीं कि हो कर रह गई। उन्होंने साल 1898 में वाराणसी में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की। पहले विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1914 में एनी बेसेंट ने साप्ताहिक समाचार पत्र ‘कॉमनविल की स्थापना की।
इसी वर्ष उन्होंने 'मद्रास स्टैंडर्ड' को खरीद कर उसे 'न्यू इंडिया' नाम दिया। बेसेंट साल 1917 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। भारत में फैली सामाजिक बुराइयों जैसे बाल विवाह, जाति व्यवस्था, विधवा विवाह आदि को दूर करने के लिए बेसेंट ने 'ब्रदर्स ऑफ सर्विस' संस्था बनाई।