उत्तराखंड के चमोली जिले की 27 वर्षीय देवेश्वरी बिष्ट ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। पढ़ाई के बाद लगभग छह साल तक उन्होंने नौकरी की लेकिन उनकी मंजिल कुछ और ही थी। उन्होंने ट्रैकिंग और फोटोग्राफी को अपना पेशा बनाया। नौकरी को छोड़कर उन्होंने अपना खुद का स्टार्टअप शुरु किया। आइए जानते हैं देवेश्वरी की सफलता की कहानी।
100 से ज्यादा लोगों को करवाई ट्रैकिंग
देवेश्वरी अबतक 30 से अधिक ट्रैक कर चुकी हैं और 100 से ज्यादा लोगों को वे ट्रेक करा चुकी हैं। नौकरी के दौरान ही वे यात्राएं करती रहती थीं। उन्हें जब भी मौका मिलता था वे घूमने चली जाती थीं। उनका यह शौक न जाने कब जुनून बन गया, उन्हें ही पता नहीं चल पाया।
पहाड़ों की संस्कृति का संरक्षण
ट्रेकिंग करते-करते वे पहाड़ों की खूबसूरती को भी अपने कैमरे में कैद करने लग गईं। उन्हें लगने लगा पहाड़ों के दर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए कुछ करना चाहिए क्योंकि आज कुछ न किया तो पहाड़ों की संस्कृति को हम खो देंगे।
करती हैं ट्रैकिंग की व्यवस्था
2016 में देवर्षि ने द ग्रेट हिमालयन जर्नी के नाम से स्टार्टअप शुरू किया जिसमें वे दूसरी जगह से आने वाले लोगों के लिए ट्रैकिंग की व्यवस्था करती हैं। वे लोगों के साथ जाती हैं और उनके लिए अन्य व्यवस्थाएं भी करती हैं। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल पाता है।