महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। महिलाएं आज केवल घर नहीं संभालती बल्कि देश भी संभालती हैं। देश के उच्च पदों पर आसीन महिलाओं ने अपने काम और उपलब्धियों से ये साबित भी किया कि उन्हें कमतर न आंके जाए। ये बातें आज की महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि उन बुजुर्ग महिलाओं पर भी लागू होती है, जिनके जज्बे को उम्र की सीमा भी रोक नहीं सकती। इसका एक उदाहरण आज बिहार में देखने को मिला, जब पंचायत चुनाव के नामांकन के दौरान एक महिला अपना नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंची। इसमें कोई बड़ी बात नहीं कि किसी महिला ने नामांकन पत्र दाखिल किया, पर खास ये है कि महिला की उम्र 80 साल है। बेहद उम्रदराज इस महिला को उनके दो बेटे अपने कंधों पर सहारा दिला कर नामांकन के लिए पहुंचे। आपके मन में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर इतनी अधिक उम्र में चुनाव मैदान में उतरने वाली ये महिला कौन है? तो चलिए बताते हैं बिहार पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य पद के लिए नामांकन पत्र भरने वाली 80 साल की पानमती देवी के बारे में।
कौन हैॆ पानमती देवी
दरअसल, 80 में पानमती देवी ने बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव में पंगरा पंचायत के वार्ड नंबर तीन से वार्ड सदस्य पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। नॉमिनेशन भरने के लिए पानमति अपने दो पुत्रों के सहारे पहुंची। पानमति विजयीपुर के सहडियरी गांव में रहती हैं। उनके तीन बेटे थे, एक बेटे का कुछ वर्ष पहले बीमारी से निधन हो गया। दो बेटे खेती करते हैं।
राजनीतिक परिवार से हैं पानमती देवी
पानमती देवी ने पंचायत चुनाव में सबसे अधिक उम्र की प्रत्याशी होने का रिकॉर्ड बना लिया है। पानमती राजनीतिक परिवार से हैं। इसके पहले उनके पति स्वर्गीय बद्री राम बिहार के भोरे विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। बता दें कि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट से बद्री राम ने साल 1962 और 1967 में भोरे विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव जीता था। लगातार दस साल तक विधायक रहे पानमती के पति का दो साल पहले निधन हो गया।
पानमती देवी क्यों उतरी चुनाव में
पानमती देवी के मुताबिक, उनके पति ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा करने में लगा दिया। उनके निधन के बाद पानमती ने पति के सपने को सच करने और वार्ड में विकास कार्य करने के लिए वार्ड सदस्य पद के चुनाव में उतरने का फैसला लिया।
पानमती देवी के लिए ये कदम आसान नहीं होगा। भले ही एक दौर था जब उनके पति का चुनावी मैदान में दबदबा था। लेकिन आज पानमती देवी के सामने कई तगड़े प्रत्याशी खड़े होंगे लेकिन पानमती देवी ने चुनाव से पहले ही एक जंग जीत ली, वह है महिला सशक्तिकरण के लिए सफल प्रयास। उनके इस कदम से कई महिलाएं और लड़कियां प्रेरित होंगी। उम्र नहीं दृढ़ शक्ति से आगे बढ़ेंगी।