विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामभक्तों को दर्शन कराने की तैयारी की है। 26 जनवरी से 21 फरवरी तक देशभर के 71400 रामभक्तों को अयोध्या में भगवान राम के दर्शन कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं के एक दिन रुकने की व्यवस्था भी वहां की जाएगी। 44 प्रांतों के लोगों के लिए अलग-अलग तिथियां तय की गईं हैं।
हरियाणा के 2000 और दिल्ली के 2000 श्रद्धालु 9 फरवरी को अयोध्या में प्रभु राम के दर्शन करेंगे। इसी तरह पंजाब के 1500 श्रद्धालुओं के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की गई है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री दिनेश उपाध्याय ने बताया कि देशभर को 44 प्रांतों में बांटा गया है, सभी प्रांतों के पदाधिकारियों से अयोध्या में दर्शन करने की इच्छा रखने वाले रामभक्तों की जानकारी मांगी है। इसी के अनुसार वहां टेंटों में रुकने की व्यवस्था की जाएगी।
हरियाणा के करीब 100 पदाधिकारी ही 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में होंगे शामिल
अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हरियाणा के करीब 100 रामभक्त ही बुलाए गए हैं, जिनमें विहिप, आरएसएस समेत कई संगठनों के प्रांत स्तर के पदाधिकारी शामिल हैं। इसी तरह प्राण प्रतिष्ठा के बाद जो रामभक्त अयोध्या जाएंगे उनकी सूची तैयार की जा रही है। ये रामभक्त भी विभिन्न संगठनों से जुडे़ हैं। दर्शन के लिए चयन करते समय आयु, स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाएगा।
प्रांत से जारी किया जाएगा प्रवेश पत्र
अयोध्या जाने वाले रामभक्तों के लिए प्रांत से प्रवेशपत्र जारी किया जाएगा। इसी प्रवेश पत्र के आधार पर वहां रुकने की व्यवस्था की जाएगी। वहां पहुंचने की जो तिथियां तय की गईं हैं उससे एक दिन पहले रामभक्त अयोध्या पहुंच जाएंगे। वहां रात में रुकना, खाना, स्थान की व्यवस्था रहेगी। तय तिथि पर दिन में दर्शन कराए जाएंगे।
संगठन करेगा बस और ट्रेन की व्यवस्था
अयोध्या पहुंचने के लिए बस और ट्रेन की व्यवस्था विश्व हिंदू परिषद द्वारा की जाएगी। इसके लिए रामभक्तों से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर, पूर्वाेत्तर, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु आदि दूर के राज्यों के रामभक्तों के लिए बसों की बुकिंग और ट्रेनों में रिजर्वेशन शुरू कर दिए गए हैं।
किस प्रांत के कितने श्रद्धालु
- ब्रज- 2000
- उत्तराखंड- 1500
- मेरठ- 2000
- चित्तौड़- 2000
- जोधपुर- 2000
- जयपुर- 2000
- काशी- 2000
- गोरक्ष- 2000
- कानपुर- 2000
- अवध- 2000
- उत्तर बिहार- 2000
- नेपाल- 300
- दक्षित बिहार- 2000
- झारखंड- 2000
- मालवा- 2500
- छत्तीसगढ़- 2000
- दक्षिण बंग- 1500
- मध्य बंग- 1500
- उत्तर बंग- 1500
- सिक्किम- 50
- अंडमान- 50
- पंजाब- 1500
- हिमाचल- 1500
- जम्मू-कश्मीर- 1000
- दिल्ली- 2000
- हरियाणा- 2000
- पूर्व ओडिशा- 1500
- पश्चिम ओडिशा- 1500
- दक्षिण गुजरात- 1500
- उत्तरी गुजरात- 1500
- सौराष्ट्र- 1500
- कोंकण- 2000
- विदर्भ- 2000
- पश्चिम महाराष्ट्र- 2000
- देवगिरी- 1500
- उत्तर पूर्व असम- 2000
- दक्षिण असम- 500
- त्रिपुरा- 500
- मणिपुर- 300
- अरुणाचल- 500
- मिजोरम- 200
- मेघालय- 300
- नागालैंड- 200
- मध्यभारत- 2500
- महाकौशल- 2500
- दक्षिण कर्नाटक- 2000
- उत्तर कर्नाटक- 1500
- दक्षिण आन्ध्र- 1000
- उत्तरी आन्ध्र- 1000
- तेलंगाना- 2000
- केरल- 2000
- उत्तरी तमिलनाडु- 1000
- दक्षिण तमिलनाडु- 1000