मंदिर जगमग, दिनभर चलती रही पूजा
प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर मंदिरों में दिनभर पूजा-अर्चना की गई। साथ में प्रसाद का भी वितरण हुआ। कई मंदिरों ने शोभायात्राएं निकालीं। सभी मंदिर में एलईडी स्क्रीन महोत्सव का सीधा प्रसारण दिखाया गया। शाम को मंदिरों को रोशनी से जगमग किया गया। कई मंदिरों में आतिशबाजी भी हुई। मंदिर मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में सुबह सुंदरकांड पाठ हुआ और प्रसाद वितरित किया गया। मंदिरों में भव्य लाइटिंग की गई। वहीं, झंडेवाला देवी मंदिर में पाठ व भजन कीर्तन किया। शाम को 11 हजार दीप जला कर दीपोत्सव मनाया गया और पटाखेबाजी की गई। छतरपुर मंदिर में भी सुंदरकांड का पाठ हुआ और लाइटिंग की गई।
कालकाजी मंदिर के साथ-साथ महंत निवास परिसर को भी रोशनी से जगमग किया गया। इसी तरह सभी इस्कॉन मंदिरों में भी भक्ति कार्यक्रम हुए और शाम को बड़ी संख्या में दीप जलाए। चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर को फूलों व रोशनी से सजाया गया। यहां एलईडी लाइटों व फूलों प्रभु राम की पूजा अर्चना की गई। इसके अलावा भंडारे का आयोजन करके प्रसाद वितरित किया। करोल बाग में बीड़नपुरा स्थित बाबा रामदेव मंदिर से लेकर देव नगर स्थित शिव मंदिर तक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। यात्रा में 11 सौ महिलाएं कलश लेकर शामिल हुई। वहीं 500 पुरुष भगवा पगड़ी बांधकर चले।
ब्रह्माकुमारी के केंद्रों में भी कार्यक्रम आयोजित
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सभी राजयोग केंद्रों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने दीप जलाकर खुशी मनाई। इसके अलावा सामाजिक व धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर के कई जगह पर भगवान राम की चैतन्य झांकी निकाली। कई सेवा केंद्रों पर भगवान राम, लक्ष्मण व सीता के चरित्र और गाथा का मंचन किया गया और मानव समाज के प्रति उनके श्रेष्ठ शिक्षा, संस्कार व मर्यादाओं को याद किया।
अशोक सिंघल फाउंडेशन ने अतिथियों को वितरित किए चांदी के सिक्के
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अशोक सिंहल के योगदान को आज हर कोई याद कर रहा है। उनके नाम पर अशोक सिंहल फाउंडेशन बनाने वाले महेश भागचंदका और उनकी पत्नी सुनीता भागचंदका प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में यजमान बने थे।
महेश ने बताया कि सिंहल के उद्देश्य का पूर्ण करने के लिए ये फाउंडेशन बनाया गया था। सोमवार को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही उनका सबसे बड़ा स्वप्न पूर्ण हो गया। इसके लिए समारोह में अतिथियों को फाउंडेशन की ओर से अशोक सिंहल की जीवनी, राम स्तंभ ब्रोशर और श्रीराम को समर्पित चांदी के सिक्के की एक स्मारिका वितरित की गई है।