सोमनाथ मंदिर के प्रशासक अयोध्या में अभिमंत्रित पत्र, आठ कुंडों का जल अयोध्या धाम के पुजारियों को समर्पित करते हुए
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सनातन धर्म में मान्यता है कि भगवान शिव राम को अपना आराध्य मानते थे। अपने आराध्य के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला माने जाने वाले सोमनाथ से भगवान राम के लिए विशेष उपहार भेजे गए हैं। सोमनाथ से प्राणप्रतिष्ठा के लिए 8 विशेष कुंडों का जल लाया गया है। इस जल से भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न कराया जाएगा।
इसी प्रकार, सोमनाथ से तीन करोड़ पचास हजार मंत्रों से अभिमंत्रित स्वर्ण और रजत पत्र से अंकित पत्र भेजा गया है। यह पत्र श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज को सोमवार को समर्पित कर दिया गया। इस अभिमंत्रित पत्र की मान्यता है कि इसके आने से प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हर तरह से संपन्न होगा और इस कार्यक्रम में किसी प्रकार का विघ्न नहीं आएगा। इसके साथ ही इस अभिमंत्रित पत्र के कारण यजमान और मंदिर दोनों को यश प्राप्त होगा।
दुनिया में भगवान शंकर के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल से इस तरह के मंत्र के आने को बहुत शुभ और सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जाता है। सोमनाथ मंदिर के पुजारी कुणाल कापणिया, प्रबंधक दिलीप चावडा, पीआरओ धुव्र जोशी ने सोमनाथ गुजरात से आया यह पत्र राम मंदिर ट्रस्ट को समर्पित किया।
क्या है उद्देश्य
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता शरद शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में हर्ष का माहौल है। अलग-अलग धर्मों, परंपराओं के लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए भगवान राम को भेंट समर्पित कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमनाथ से यह जल और विशेष अभिमंत्रित पत्र अयोध्या आया है।
शरद शर्मा ने कहा कि इतने हर्षमय माहौल के बाद भी कुछ लोग राजनीतिक कारणों से प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि राम का विरोध करके इस देश में कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल सफलता हासिल नहीं कर सकता। उन्हें भी भगवान राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और हिंदू समाज की भावनाओं को देखते हुए ऐसी किसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए जिससे हिंदू समाज का अपमान हो।