क्या है रामानंदी परंपरा?
रामानंदी परंपरा या रामानंदीय सबसे बड़े संप्रदायों में से एक है, जो समानतावादी विचारधारा पर चलता है। इस पंथ की शुरुआत स्वयं भगवान श्रीराम से मानी जाती है। एक एक वैष्णव संप्रदाय है, अतः श्रीहरि के अन्य अवतारों की पूजा पर भी जोर देता है। रामानंदी संप्रदाय के लोग शाकाहार का पालन करते हैं। साथ ही वो रामानंद के विशिष्टाद्वैत सिद्धांत पर चलते हैं। बताया जाता है कि स्वामी रामानंदाचार्य ने वैष्णव पूजा परंपरा को प्रचार अभियान का साधन बनाया और वैष्णव, शैव और शाक्त इन तीन धार्मिक परंपराओं से पूजा की। यहां भगवान श्री राम और माता सीता को आराध्या देव मानकर पूजा की जाती थी। दक्षिण के वैष्णव संत स्वामी रामानुजाचार्य ने भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को ईष्ट देव माना और इस परंपरा से पूजा की जाती थी। इसलिए अयोध्या के कुछ मठों में रामानुजाचार्य परंपरा से भी पूजा होती है।
रामलला की पूजा का विधान
रामानंदी परंपरा के अनुसार प्रभु राम के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दौरान उनके लालन-पालन, खान-पान का ध्यान रखा जाता है। आइए जानते हैं पूरी विधि-
- रामलाल को शयन से उठाने के बाद लाल चंदन और शहद से उन्हें स्नान कराया जाता है।
- दोपहर को विश्राम और सांय भोग आरती के बाद शयन को जाने तक 16 मंत्रों की प्रकिया पूरी की जाती है।
- सभी अनुष्ठान भगवान श्री राम के बाल रूप को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
- प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी पूजन की यही विधि रहेगी।