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Ayodhya Ram Mandir: क्या है रामानंदी परंपरा, जानें प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला की पूजा का पूरा विधान

Mon, 22 Jan 2024 05:13 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अयोध्या के रामजन्म भूमि मंदिर में रामलला की पूजा की परंपरा काफी वर्षों से चली आ रही है। और यही कारण है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी इसी विधि से पूजन किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है रामानंदी परंपरा और रामलला की पूजा का पूरा विधान। 
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रामानंदी परंपरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ramlala Puja Vidhi: अयोध्या में आज (22 जनवरी 2024) रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का पूजन एक विशेष परंपरा से होगा। इस परंपरा को रामानंदी परंपरा कहा जाता है। अयोध्या के रामजन्म भूमि मंदिर में रामलला की पूजा की परंपरा काफी वर्षों से चली आ रही है। और यही कारण है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी इसी विधि से पूजन किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है रामानंदी परंपरा और रामलला की पूजा का पूरा विधान।

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क्या है रामानंदी परंपरा?
रामानंदी परंपरा या रामानंदीय सबसे बड़े संप्रदायों में से एक है, जो समानतावादी विचारधारा पर चलता है। इस पंथ की शुरुआत स्वयं भगवान श्रीराम से मानी जाती है। एक एक वैष्णव संप्रदाय है, अतः श्रीहरि के अन्य अवतारों की पूजा पर भी जोर देता है। रामानंदी संप्रदाय के लोग शाकाहार का पालन करते हैं। साथ ही वो रामानंद के विशिष्टाद्वैत सिद्धांत पर चलते हैं। बताया जाता है कि स्वामी रामानंदाचार्य ने वैष्णव पूजा परंपरा को प्रचार अभियान का साधन बनाया और वैष्णव, शैव और शाक्त इन तीन धार्मिक परंपराओं से पूजा की। यहां भगवान श्री राम और माता सीता को आराध्या देव मानकर पूजा की जाती थी।  दक्षिण के वैष्णव संत स्वामी रामानुजाचार्य ने भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को ईष्ट देव माना और इस परंपरा से पूजा की जाती थी। इसलिए अयोध्या के कुछ मठों में रामानुजाचार्य परंपरा से भी पूजा होती है। 

रामलला की पूजा का विधान 
रामानंदी परंपरा के अनुसार प्रभु राम के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दौरान उनके लालन-पालन, खान-पान का ध्यान रखा जाता है। आइए जानते हैं पूरी विधि- 
  • रामलाल को शयन से उठाने के बाद लाल चंदन और शहद से उन्हें स्नान कराया जाता है। 
  • दोपहर को विश्राम और सांय भोग आरती के बाद शयन को जाने तक 16 मंत्रों की प्रकिया पूरी की जाती है।
  • सभी अनुष्ठान भगवान श्री राम के बाल रूप को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
  • प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी पूजन की यही विधि रहेगी।

भोग की विधि 
  • रामलला को एक दिन में चार बार भोग लगाया जाता है। 
  • ये व्यंजन राम मंदिर की रसोई में तैयार किए जाते हैं। 
  • रामलला की सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है, इसमें रामलला को रबड़ी, पेड़ा या कोई और मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। 
  • रामलला को दोपहर के समय में राजभोग लगाया जाता है, जिसमें दाल, चावल, रोटी, सब्जी, सलाद और खीर शामिल है।  
  • संध्या आरती के समय भी अलग-अलग मिष्ठान चढ़ाए जाते हैं और रात में भी पूरा भोजन चढ़ाया जाता है।  
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3 समय होगी आरती
  • प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला की एक दिन में पूरे 3 समय आरती की जाएगी। 
  • दोपहर के समय 12 बजे रामलला की भोग आरती होती है 
  • साढ़े सात बजे संध्या आरती होती है 
  • इसके बाद रामलला को साढ़े आठ बजे अंतिम आरती करके शयन करवाया जाता है। 
  • रामलला के दर्शन साढ़े सात बजे तक ही किए जा सकते हैं। 
  • इसके बाद उनके शयन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 
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