पांच सदी तक चले संघर्ष के बाद आखिरकार सोमवार को वह शुभ घड़ी होगी, जब रामलला अपने जन्मस्थान पर बने मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत संत समाज और अति विशिष्ट लोगों की उपस्थिति में सोमवार को रामलला के श्रीविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक अनुष्ठान होगा। इस ऐतिहासिक, अद्भुत, अलौकिक, अकल्पनीय और अद्वितीय क्षण का स्वागत करने के लिए देश ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों में भी उल्लास, उत्साह और उमंग दिख रही है।
पीएम मोदी सोने की सलाई से रामलला को लगाएंगे काजल
84 सेकंड का मुहूर्त
मंगल ध्वनियों से गूंज उठेगा भव्य-नव्य मंदिर
सुबह 10 बजे से पूरा मंदिर मंगल ध्वनि से गूंज उठेगा। इसके लिए यूपी के पखावज, बांसुरी, ढोलक, कर्नाटक की वीणा, महाराष्ट्र की सुंदरी, पंजाब के अलगोजा, ओडिशा के मर्दल, मध्य प्रदेश के संतूर, मणिपुर के पुंग, असम के नगाड़ा और काली, छत्तीसगढ़ के तंबूरा, बिहार के पखावज, दिल्ली की शहनाई, राजस्थान के रावणहत्था, बंगाल के श्रीखोल, सरोद, आंध्र का घटम, झारखंड के सितार, गुजरात के संतार, तमिलनाडु के नागस्वरम, तविल, मृदंग और उत्तराखंड के हुड़का वाद्ययंत्र का चयन किया गया है।
नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम।
लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम॥
अर्थात भगवान के नीले कमल, नीलमणि और नीले (जलयुक्त) मेघ के समान (कोमल, प्रकाशमय और सरस) श्यामवर्ण शरीर की शोभा देखकर करोड़ों कामदेव भी लजा जाते हैं।
मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक : मुर्मू
प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा, यह सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के नए कालचक्र की शुरुआत के साक्षी बन रहे हैं। प्रभु श्रीराम ने साहस, करुणा और अटूट कर्तव्यनिष्ठा जैसे जिन सार्वभौमिक मूल्यों की प्रतिष्ठा की थी, उन्हें भव्य मंदिर के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। श्रीराम हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के सर्वोत्कृष्ट पक्षों के प्रतीक हैं। न्याय और जन कल्याण पर केंद्रित प्रभु श्रीराम की रीति का प्रभाव हमारे देश के शासन संबंधी वर्तमान दृष्टिकोण पर दिखाई देता है। पीएम मोदी के 11 दिवसीय कठिन अनुष्ठान को राष्ट्रपति मुर्मू ने त्याग की भावना से प्रेरित सर्वोच्च आध्यात्मिक कृत्य और प्रभु श्रीराम के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव बताया। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति का आभार जताते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय विरासत एवं संस्कृति को और समृद्ध करने के साथ ही विकास यात्रा को नए उत्कर्ष पर ले जाएगा।
संघर्ष से सिद्धि...टेंट से भव्य मंदिर तक
दो तारीखें...जिन्हें देश भुला न सकेगा