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Ayodhya Ram Mandir : पूजित अक्षत के साथ बांटे जा रहे हैं राम मंदिर के मॉडल, घर-घर दीप पहुंचाने की तैयारी

Wed, 10 Jan 2024 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

कोई अक्षत बांट रहा है तो कोई अयोध्या मंदिर का कार्ड छपवा कर मंदिर पहुंचने का निमंत्रण दे रहा है। कई लोग तो घर-घर दीप पहुंचाने की तैयारी में है।
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सांकेतिक तस्वीर...
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विस्तार
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प्रभु श्रीराम के प्रति लोगों का स्नेह हर जगह दिख रहा है। कोई अक्षत बांट रहा है तो कोई अयोध्या मंदिर का कार्ड छपवा कर मंदिर पहुंचने का निमंत्रण दे रहा है। कई लोग तो घर-घर दीप पहुंचाने की तैयारी में है। साथ ही राम मंदिर का मॉडल भी बांटे जा रहे हैं। यह प्रक्रिया एक तरह से जनसंपर्क बढ़ाने का भी बना हुआ है। विश्व हिंदी परिषद, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता के साथ ही भाजपा नेता भी इस माध्यम से जनसंपर्क बढ़ा रहे है। चुनावी तैयारी का भी माध्यम बना हुआ है।

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दिल्ली के हर गली-मुहल्ले में अयोध्या में श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा चर्चा का विषय बना हुआ है। सुबह से ही प्रभात फेरी का दौर शुरू हो रहा है। सुबह और शाम के वक्त लोगों के यहां डोर बेल भी बज रही है। इसमें कोई बाहर खड़ा होकर निमंत्रण पत्र देते दिखाई पड़ रहा है। रमेश नगर, कीर्ति नगर, कर्मपुरा, मोती नगर में इन दिनों अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर का थ्री डी मॉडल लोगों को सौंपे जा रहे है। यह एक अभियान की तरह है।

इसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री व राम मंदिर निर्माण के अगुवा रहे मदन लाल खुराना के बेटे हरीश खुराना ज्यादा सक्रिय है। वे घर-घर पहुंचकर लोगों को पूजित अक्षत, राम मंदिर उद्घाटन समारोह के दिन 22 जनवरी को समीप के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना में शामिल होने का निमंत्रण के साथ श्री राम मंदिर का थ्री डी मॉडल भेंट कर रहे है। लकड़ी वाला यह मॉडल दिखने में श्रीराम मंदिर जैसे प्रतीत होते हैं।
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हनुमानजी व भगवान राम की 51 फीट ऊंची मूर्ति का होगा अनावरण
अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाली रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मद्देनजर राजधानी में भी मंदिर समितियों ने अपने यहां भी उसी दिन मूर्ति का अनावरण करने की योजना बनाई है। इस कड़ी में दो मंदिरों ने अपनेे परिसर में मूर्ति स्थापित करने की घोषणा की है। 

राजधानी की गीता कालोनी में भगवान हनुमान की 51 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण किया गया है। मंदिर समिति ने 22 जनवरी को अयोेध्या में होने वाले राम लला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दिन ही हनुमान मूर्ति का अनावरण करने का निर्णय लिया है। मूर्ति के एक कंधे पर भगवान राम और दूसरी कंधे पर लक्ष्मण की मूर्ति है और हनुमान दोनों हाथों से उन्हें पकड़े हुए हैं।

दूसरी ओर असोला स्थित शनिधाम में भी 22 जनवरी को ही भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जाएगी। यहां पर भगवान राम का अलग मंदिर बनाया गया है। मंदिर में भगवान राम के साथ सीता, लक्ष्मण, भरत व हनुमान की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी। 

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तुलसी के राम मेरे सबसे करीब...

असगर वजाहत - फोटो : अमर उजाला
तुलसी के राम को मैं अपने सबसे करीब पाता हूं। जिन राम को तुलसी ने सृजित किया है, उनमें लालित्य है। वह मोहक हैं, आकर्षक हैं। सबको मुग्ध कर लेते हैं। उनकी शख्सियत का हर कोण आदर्श है।

इस आदर्श तक पहुंचने की कोशिश भी मैं करता रहा हूं। राम का पर्याय ही सरल और सहज हो जाना है। वह बार-बार इसे साबित भी करते हैं। प्रकृति, परिवार, मित्र और शत्रु सबसे उनका व्यवहार हर जगह सरल भी है, सहज भी। भारतीय चेतना में यही राम मौजूद हैं। यही सब में रचे-बसे हैं। मुझमें भी वही हैं। इससे बाहर जाकर मैं राम को नहीं देख पाता।

यह राम नाम की स्वीकार्यता ही है कि उर्दू व फारसी में भी इन पर खूब लिखा गया है। जिसने भी कलम चलाई है, उसने राम को तुलसी से ही जाना-समझा है। मीर तकी मीर लिखते हैं, 'सेहर किया एजाज किया, जिन लोगों ने तुझ को राम किया।'

सीधी सी बात है कि जहां मान मनौवल, प्रेम, सहमति सरीखे भाव हैं, वहां राम सहज रूप से मौजूद हैं। यही राम मुझे भी प्रिय हैं। एक बात और। यह इसलिए भी संभव हो सका कि तुलसी परंपरा से मिले राम को जस का तस नहीं स्वीकारते।

वह राम से जैसे लगातार संवादरत रहते हैं और इस क्रम में अपने आराध्य का निर्माण करते हैं। यह आराध्य मानवीय है। सबका कल्याण चाहने वाला है। और इस भरोसे से पैदा हुआ है कि वह किसी का अहित नहीं कर सकता। मैंने अपने नाटक महाबली में इसका जिक्र भी किया है।
-असगर वजाहत, साहित्यकार
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