प्राण प्रतिष्ठा कब होनी चाहिए, इसका निर्णय आठ माह और 16 बैठकों में तय हुआ। पीएम नरेंद्र मोदी के 5 अगस्त, 2020 को शिलान्यास करने के साथ ही श्रीराममंदिर निर्माण कार्य शुरू हो गया। वर्ष 2023 की शुरुआत तक मंदिर का काम काफी हो चुका था।
प्राण प्रतिष्ठा पर विचार-विमर्श पहली बार पिछले वर्ष मार्च में हुआ। इसे लेकर हुई बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद व संघ के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके बाद हर महीने 15 दिन के अंतराल में दो बैठकें की गईं।
अक्तूबर, 2023 में तय हुआ कि प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को की जाएगी। इस दौरान मंदिर में होने वाले कार्यक्रम, स्वागत, पूजन, संतों के रुकने का स्थान समेत उन सभी बिंदुओं की तैयारी पर चर्चा हुई।
अंतिम दो बैठकों में तय हुईं सभी जिम्मेदारियां
संतों को पहले घर में ठहराने की बात हुई। बाद में टेंट सिटी पर सहमति बनी। इन्हीं बैठकों में यातायात विभाग ने यातायात व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण दिया। अंतिम दो बैठकों में सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां और प्रवास तय हुआ।
संघर्ष से निर्माण तक लिया ही...अब दर्शन का न्योता
बैठकों में पहले से कुछ भी तय नहीं होता था। आपसी चर्चा में विचार आते थे और सभी की सहमति से उन्हें शामिल कर लिया जाता था। एक जनवरी से घर-घर जाकर पूजित अक्षत देने के साथ ही रामभक्तों को अयोध्या आने का आमंत्रण देने का विचार संघ के वरिष्ठ अधिकारी ने दिया। अप्रैल में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि अब तक हमने रामभक्तों से सिर्फ लिया ही है।
कारसेवकों ने बलिदान दिया। शिला पूजन में बीस आना लिया, मंदिर निर्माण में सहयोग निधि लिया। वे संघर्ष के दिन थे, अब उल्लास की ओर हैं। रामलला विराजमान होने जा रहे हैं। अब बारी है, रामलला के भक्तों को कुछ देने की। क्यों न हम उन्हें रामलला के दर्शन के लिए आमंत्रण और अक्षत भेजें। इस विचार को सहर्ष स्वीकार कर लिया गया।