केन्द्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा उ.प्र. और पूर्वांचल की राजनीति को बारीकी से समझते हैं। 1982 में बीएचयू के अध्यक्ष रहे सिन्हा टेक्नोक्रेट(बीटेक, एमटेक) हैं। मनोज सिन्हा ने उ.प्र. में विधानसभा चुनाव पर शशिधर पाठक से विस्तार से चर्चा की। पेश है प्रमुख अंश-
प्रश्न : उ.प्र. विधानसभा चुनाव को किस तरह से देख रहे हैं। चुनाव को लेकर राजनीतिक दल और मतदाता कौन, कितने भ्रम में है?
उत्तर : मतदाता किसी तरह के भ्रम में नहीं है। वह राज्य में बदलाव का मन बना चुका है। भाजपा भी किसी भ्रम में नहीं है। हम राज्य में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रहे हैं। बाकी कोई और भ्रम में है तो हम नहीं कह सकते।
प्रश्न : इतने बड़े आत्म विश्वास का आधार क्या है?
उत्तर : पिछले दिनों से भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। हमें युवा, महिला, किसान सम्मेलनों में जिस तरह का जन समर्थन मिला है, उससे आश्वस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कामकाज से प्रदेश की जनता और देश के लोगों में उत्साह बढ़ा है। भारत की छवि निखरी है और लोग इसे महसूस कर रहे हैं।
प्रश्न : उ.प्र. में सपा सरकार सत्ता में है और सत्ता पाने की मुहिम में है। सरकार का नारा है 'विकास बोलता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन भी।' कहीं आप अनदेखी तो नहीं कर रहे हैं?
उत्तर : पिछले चुनाव में लोगों ने सपा को बड़े उत्साह और उम्मीद से वोट दिया था। लोगों को लगा था कि विदेश से पढ़कर आए अखिलेश यादव अलग तरह की सरकार चलाएंगे। जातिगत राजनीति से अलग कुछ नया करेंगे, लेकिन उ.प्र. के लोग निराश हुए हैं।
प्रश्न : यानी अखिलेश उ.प्र. की सरकार नहीं चला पाए?
उत्तर : व्यक्ति नहीं, मुद्दों पर केन्द्रित बात करना चाहता हूं। इसलिए मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दीजिए। सीधी सी बात है कि कानून का राज होगा तो निवेश आएगा और विकास होगा। अखिलेश के नेतृत्व वाली सरकार इसमें फेल रही है। मथुरा में जवाहर बाग की घटना, मुजफ्फरनगर दंगा, सहारनपुर में व्यभिचार, मुख्यमंत्री आवास से 200 मीटर की दूरी पर महिला से बलात्कार और उसकी हत्या, गाजीपुर से लेकर गाजियाबाद तक जमीन, प्लॉट, मकान पर समाजवादी पार्टी से जुड़े तत्वों के कब्जे। इन सबने एक रिकार्ड बना दिया है।