‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ की बात करने वाली भाजपा अब हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे जनता के बीच उठा रही है। क्या एक बार फिर आम चुनाव जनहित के जमीनी मुद्दों की बजाय इन भावनात्मक मुद्दों पर लड़ा जाएगा? इन्हीं सवालों को लेकर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता इन्द्रेश कुमार से हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
सवाल: केंद्र सरकार पहले अपने काम के आधार पर जनता से वोट मांगने की बात कर रही थी, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान अब पीएम मोदी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और पाकिस्तान के मुद्दे उठाने लगे हैं। क्या ये चुनाव अब ‘काम’ की बजाय इन्हीं मुद्दों पर लड़ा जाएगा?
जवाब: भाजपा ने तो पीएम के काम के आधार पर ही वोट मांगने की पहल की थी, लेकिन अगर विपक्ष देशद्रोह कानून को खत्म करने की बात करेगा तो क्या ये हमारी जिम्मेदारी नहीं कि हम देश को बताएं कि उनके इरादे क्या हैं? और इस कदम के भविष्य में क्या घातक परिणाम देश को भुगतने पड़ सकते हैं?
सवाल: लेकिन हिंदुत्व का मुद्दा तो सबसे पहले आपकी तरफ से ही उठाया गया? पीएम ने राहुल पर अल्पसंख्यक बहुल सीट से चुनाव लड़ने पर तंज कसा।
जवाब: बिलकुल नहीं। शुरुआत भी उन्हीं की तरफ से हुई। आखिर वायनाड से ही चुनाव लड़ने का चयन क्यों किया गया? क्या कांग्रेस अध्यक्ष की उस मंशा के बारे में लोगों को जानकारी नहीं होनी चाहिए? अब जब उनकी कलई खुल रही है तो मीडिया इसे सांप्रदायिक रंग क्यों करार दे रहा है?
सवाल: कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में अफस्पा कानून में बदलाव करने और देशद्रोह कानून को खत्म करने की बात कही है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की इस पर क्या राय है?
जवाब: इसी के साथ यह भी जोड़िए कि नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री होने की मांग की है। देखिए, शेख अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री नेहरू की गलतियों का खामियाजा आज भी देश भुगत रहा है।
अगर कांग्रेस अपने मकसद में कामयाब होती है तो इससे देश के विभाजन का रास्ता तैयार होगा। ये देश अब दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा और अपनी मंशा कामयाब करने का कोई अवसर उन्हें नहीं देगा।