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प्रियंका गांधी ने कम कर दिया राहुल गांधी का सिर दर्द

Thu, 11 Apr 2019 09:39 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
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राहुल गांधी के कार्यालय और कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों ने राहत की सांस ली है। फरवरी 2019 से कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी का उन्हें समय मिल पा रहा है। इतना ही नहीं राहुल गांधी रणनीतिक मामलों में अब खुलकर निर्णय ले रहे हैं और उनके निर्णय में बदलाव की गुंजाइश काफी घट गई है। सूत्र बताते हैं कि ऐसा प्रियंका गांधी वाड्रा के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद हुआ है। प्रियंका गांधी न केवल संगठनात्मक कामों में राहुल गांधी की काफी मदद कर रही हैं, बल्कि भाजपा समेत अन्य विरोधी दलों के हमले को भी कुंद कर रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के करीबियों की माने तो प्रियंका ने राहुल गांधी का एक बड़ा बोझ अपने सिर पर ले लिया है।

तीन महीने पहले थी असमंजस की स्थिति

राहुल गांधी की टीम के एक करीबी सदस्य का कहना है कि तीन पहले स्थिति काफी विपरीत थी। राजस्थान, मध्यप्रदेश (म.प्र.), छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान निर्णय लेने से लेकर तमाम मामलों में काफी असमंजस की स्थिति बन रही थी।
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सूत्र बताते हैं कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने स्वास्थ्य कारणों से तथा राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद खुद को काफी सीमित कर लिया था। वह कांग्रेस के बड़े नेताओं से लेकर सहयोगी दलों के नेताओं तक को राजनीतिक मामलों में निर्णय के लिए राहुल से मिलकर चर्चा करने की सलाह देती थी। टीम सोनिया के सदस्य भी पूरी तरह से निर्णय के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पर निर्भर थे। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष के सिर पर तमाम जिम्मेदारी अचानक आई थी।

राहुल की कोटरी के सदस्य के मुताबिक ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष के पास काम का बोझ काफी बढ़ गया था, लेकिन प्रियंका ने कांग्रेस महासचिव के पद पर इंट्री करने के बाद से आपरेशन डैमेज कंट्रोल को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया है। वह पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की विश्वसनीय और नंबर एक सलाहकार थीं। अब उस भूमिका के साथ-साथ पार्टी के कामकाज में भी खुलकर हाथ बंटा रही हैं।

हर राज्य में बढ़ गई है मांग

लोकसभा चुनाव 2019 में पहले चरण का मतदान हो चुका है। इसमें भी आठ विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ है और कांग्रेस का प्रत्याशी अपने क्षेत्र में प्रियंका का दौरा चाह रहा था। बताते हैं जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक प्रियंका गांधी कांग्रेस की सबसे अधिक डिमांड वाली नेता हैं।
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पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारक की श्रेणी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के बाद चौथे नंबर पर रखा है। पार्टी के एक महासचिव ने स्पष्ट किया कि वह लोकसभा चुनाव-2019 में उत्तर प्रदेश (उ.प्र.) के अलावा अन्य राज्य में भी जाएंगी। 
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प्रियंका से कांग्रेस को क्या उम्मीद है

प्रियंका गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उ.प्र. में कांग्रेस की जड़ें पुनर्जीवित करने का सपना संजोए हैं। पार्टी के रणनीतिकारों की टीम को प्रियंका गांधी वाड्रा इस सपने की बैक बोन नजर आ रही हैं। कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी उ.प्र. के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रियंका के भीतर शानदार संभावनाएं दिखाई देती है।

उ.प्र. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी और संजय सिंह भी प्रियंका को लेकर बहुत आश्वस्त हैं। खुद राहुल गांधी का कहना है कि उन्होंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य से कहा है कि वह उ.प्र. में कांग्रेस की अगली सरकार बनाने की संभावनाओं पर काम करें। इस तरह से प्रियंका गांधी को लेकर कांग्रेस का लक्ष्य बड़ा है।

कांग्रेस महासचिव ने इसके लिए अपनी निजी सहयोगी प्रीती सहाय और सहायक धीरज श्रीवास्तव के अलावा अपनी टीम का विस्तार करना शुरू कर दिया है। वह कांग्रेस के नेताओं को भी भरोसा देती हैं कि कांग्रेस अगले कुछ सालों में इस लक्ष्य को हासिल कर लेगी।

लोकसभा चुनाव-2019

लोकसभा चुनाव 2019 भारतीय राजनीति में मजबूती से टिके रहने के उद्देश्य से कांग्रेस के लिए बहुत अहम है। इसके प्रचार को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस अध्यक्ष के लिए बहुत उपयोगी हैं। पार्टी के एक प्रमुख रणनीतिकार का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष नया मुद्दा खड़ा करते हैं तो पार्टी का मीडिया विभाग और अन्य नेता उसे देश की जनता तक ले जाने की रणनीति को अमल में लाते हैं।

वहीं प्रियंका गांधी कांग्रेस तथा कांग्रेस अध्यक्ष पर होने वाले राजनीतिक हमलों से बचाकर भाजपा और विरोधी दलों को उनकी ही पिच पर उलझाकर रख रही हैं। इससे कांग्रेस के आत्मविश्वास को काफी बल मिल रहा है।
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असर तो दिख रहा है, देखिए

प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा प्रियंका की जिम्मेदारी राहुल गांधी की अमेठी और वायनाड तथा सोनिया गांधी की रायबरेली सीट को रिकार्ड मतों से जीतने का रास्ता तैयार करना भी है। केरल में वायनाड सीट से राहुल गांधी के नामांकन के समय वह साये की तरह उनके साथ थीं।

अमेठी और रायबरेली में सोनिया और राहुल के नामांकन के समय भी प्रियंका साथ थीं। उनके सहायक धीरज श्रीवास्तव अमेठी, रायबरेली सीट पर कांग्रेस का परचम फहराने का खाका खींच रहे हैं। वायनाड की सीट जीतने के लिए भी प्रियंका की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं।

इसके अलावा उ.प्र. में कांग्रेस को पश्चिम से पूर्व तक प्रचार करके कम से कम 10 सीटों के सम्मानजनक स्कोर तक लाने की प्राथमिकता है। 

असर तो दिख रहा है, देखिए

प्रियंका के कांग्रेस महासचिव बनने का असर क्या हुआ? सवाल सरल था। इस सवाल के जवाब में टीम राहुल के एक सदस्य का कहना है कि अक्टूबर 2018 तक लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की स्थिति बहुत साफ नहीं थी। पार्टी हर राज्य में सहयोगी दलों के साथ आगे बढऩे के रास्ते पर थी।

अब हमारे पास इसका असमंजस नहीं है। हम कुछ राज्यों में गठबंधन को नकारने की स्थिति में आए हैं। सूत्र का कहना है कि यह बदलाव कांग्रेस की स्थिति को बताने के लिए काफी है। क्योंकि आप देख सकते हैं कि भाजपा का कोई दांव लगातार समय के साथ अपना असर खो रहा है।
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