कांग्रेस की तेज तर्रार प्रवक्ता रहीं प्रियंका चतुर्वेदी के शिव सेना में शामिल होने का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। उनके कांग्रेस छोड़ने की वजह मथुरा की घटना को बताया जा रहा है जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ अभद्रता की थी। प्रियंका की शिकायत पर पहले तो इन आठ कार्यकर्ताओं को निलंबित किया गया, फिर माफीनामे के बाद पार्टी में शामिल कर लिया गया। इससे आहत होकर प्रियंका ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया।
लेकिन क्या यही एक वजह है जिसने प्रियंका को कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर किया? अंदरखाने एक और कहानी सामने आ रही है। चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिए जाने से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ी है। 19 जून 2015 का उनका ट्वीट इन दिनों चर्चा में है। इसमें उन्होंने कहा था- 'आखिर कैसे एक व्यक्ति सुबह उठता है और अपनी विचारधारा को ऐसे बदल लेता है जैसे कोई कपड़े बदलता है।" आज वही ट्वीट उनके लिए आलोचना का सबब बन गया है। अब इस ट्वीट का जिक्र खूब होने लगा है।
चर्चा ये है कि प्रियंका की नाराजगी की एक वजह उर्मिला मातोंडकर को टिकट मिलना भी है। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका मुंबई नॉर्थ से टिकट की आस में थीं, लेकिन उर्मिला को टिकट मिल गया। प्रियंका साल 2010 से कांग्रेस में है। लेकिन अभी तक उन्हें किसी चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। वह एक प्रभावशाली वक्ता रही हैं, हर मंच से उन्होंने कांग्रेस की बात मजबूती से रखी, सोशल मीडिया पर भी वह खूब सक्रिय रहती हैं। लेकिन उर्मिला को उनपर तरजीह दे दी गई।
मुंबई में ही पली बढ़ीं प्रियंका ने साल 2010 में कांग्रेस ज्वाइन की थी। दो साल में ही वह उत्तर पश्चिम मुंबई के यूथ कांग्रेस की महासचिव बन गईं। पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता चला गया और पार्टी महासचिव भी नियुक्त हुईं। लेकिन कांग्रेस का लगातार उन्हें नजरअंदाज करना पार्टी को भारी पड़ गया। मथुरा कांड ने इस असंतोष को हवा दी। सूत्र बताते हैं कि यहीं से शिवसेना और उनके बीच बातचीत का रास्ता खुला।
मथुरा कांड की वजह से वह पार्टी आलाकमान से बेहद नाराज थीं। उन्होंने बदसलूकी करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत तक दी थी। पार्टी ने इन्हें निलंबित किया। लेकिन वेस्ट यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया के दखल पर सभी को वापसी करा दी गई। इस बीच मुंबई नॉर्थ से उर्मिला मातोंडकर को टिकट दिया जाना उन्हें और अखर गया। आखिर में उन्होंने हाथ का साथ छोड़ शिवसेना का दामन थामना ही बेहतर समझा। गौर करने लायक बात यह है कि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ कहा कि मुझे उम्मीद थी कि कांग्रेस मुझे अलग मुकाम पर ले जाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ।