संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच में जूताकांड की असली वजह विधायक का बीच में हस्तक्षेप करना है। शरद त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने जैसे ही समीक्षा बैठक के दौरान इंजीनियर से पूछना शुरू किया, विधायक बघेल बीच में कूद पड़े। इसके बाद सांसद विधायक में संक्षिप्त कहासुनी के बाद जूता-तमाचा कांड हो गया।
विधायक बघेल का कहना है कि आप पूरा वीडियो देख लीजिए। शुरू से शरद त्रिपाठी का रुख देख लीजिए हमें कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आगे कुरेदने पर विधायक राकेश सिंह बघेल का कहना है कि हर चीज का एक वातावरण, समय और माहौल होता है। जो सांसद शरद त्रिपाठी उस समय कह रहे थे, उसका सही समय नहीं था। बघेल का कहना है कि स्थिति इस तरह की पैदा हो गई कि उन्हें बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। राकेश सिंह बघेल का कहना है कि उन्होंने शरद त्रिपाठी से केवल इतना ही कहा कि इस विषय पर हम आपके साथ अलग बैठकर बात कर लेंगे। बघेल का कहना है कि इसमें क्या बुराई थी। मोटरसाइकिल रैली में सांसद उनके पीछे बैठे थे और वह मोटर साइकिल चला रहे थे। राजनीति में दोनों एक दूसरे को काफी दिन से जानते हैं, इसमें अलग से बैठकर बात करने में क्या हर्ज था?
राकेश सिंह बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी ने कहा चुप रहिए, आप जैसे 50 विधायक हमने निकाल दिए हैं। बघेल को यह खल गया। उनका कहना है कि एक तो पहली बार 2014 में वह सांसद बने। इसके पहले कभी विधायक भी नहीं रहे। विधानभा चुनाव 2017 में वह अपने संसदीय क्षेत्र को समय ही नहीं दिए, फिर विधायक कहां से पैदा करने लगे। जबकि शरद त्रिपाठी के अनुसार विधायक को अधिकारी से बातचीत के दौरान बीच में आने की जरूरत ही नहीं थी।
बघेल का कहना है कि शरद त्रिपाठी के बारे में जानना हो तो उनके संसदीय क्षेत्र के पांचों विधायकों से पूछिए। वह बता देंगे कि उस दिन क्या हुआ था और वह (बघेल) या सांसद जी कैसे आदमी हैं? पुराने विधायक श्रीराम चौहान या विधायक जय चौबे से पूछ लीजिए। बघेल का आरोप है कि सांसद बनने के बाद शरद त्रिपाठी पांचों विधानसभा क्षेत्र में न के बराबर गए। जबकि वह बराबर अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा नहीं चलती तो वह बमुश्किल लखनऊ जाते हैं। अपने क्षेत्र में ही रहते हैं। बघेल का दावा है कि यदि वह अपने विकास कार्य का लेखा-जोखा रख देंगे तो लोग दांतो तले अंगुली दबा देंगे।