जयपुर के एक 22 साल के युवक ने इसलिए फांसी लगा ली क्योंकि वह अकेलेपन से तंग आ गया था।
उसके परिवार वालों और दोस्तों ने उससे दूरी बना ली थी क्योंकि उन्हें कुछ साल पहले पता चल गया था कि उसे एड्स है।
वह हमेशा अकेला रहता था और वह अवसाद से घिर गया था।
हद उस वक्त हो गई जब पोस्टमार्टम के लिए मना करते हुए डॉक्टरों ने शव को हाथ भी नहीं लगाया।
डॉक्टरों ने अमानवीयता की हदें पार करते हुए परिवार के लोगों पर दबाव बनाते हुए पत्र लिखवाया कि वे पोस्टमार्टम नहीं चाहते हैं।
उन्होंने पुलिस को भी घुमाने की कोशिश की लेकिन पुलिस की पहल के चलते पोस्टमार्टम करना पड़ा।