वसुंधरा राजे माउंट आबू में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुईं।
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राजस्थान में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा, इस पर घमासान मचा हुआ है। दावेदारी को मजबूती देने वसुंधरा राजे ने जिलों के दौरे शुरू कर दिए हैं। इससे विरोधी खेमा भी सतर्क हो गया है। वसुंधरा हर जगह जाकर कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साध रही है। उन्होंने माउंट आबू में कहा कि कांग्रेस की सरकार आते ही विकास कार्यों पर ब्रेक लग जाते हैं।
वसुंधरा ने जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर माउंट आबू में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं को डॉ. मुखर्जी जी की विचारधारा के बारे में बताया। साथ ही उनके आदर्शों से सीख लेकर राष्ट्रसेवा में जुटने को प्रेरित किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि जनता ने पिछले 25 वर्षों में जान लिया है कि अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार आते ही प्रदेश में विकास पर ब्रेक लग जाता है। जिस दिन भाजपा की सरकार चली जाती है, उसी दिन से विकास पर कट ऑफ डेट लग जाती है। अब जब डेढ़ साल बाद भाजपा की सरकार बनेगी तो जनता के रुके हुए काम पूरे होंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से प्रदेश में स्वच्छता अभियान को गति देने का आह्वान किया। यह सफाई सिर्फ माउंट आबू में ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में दिखनी चाहिए क्योंकि लोग स्वच्छता से जुड़ेंगे तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा।
उदयपुर में लगे थे वसुंधरा के समर्थन में नारे
वसुंधरा के उदयपुर दौरे के दौरान समर्थकों ने केसरिया में हरा-हरा, राजस्थान में वसुंधरा के नारे लगाए। जिस समय यह नारेबाजी हो रही थी उस समय नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया भी वसुंधरा राजे के साथ मौजूद थे। इस दौरान राजे के साथ कटारिया के धुर विरोधी जनता सेना के प्रमुख रणधीर सिंह भींडर भी मौजूद थे। पूर्व मंत्री युनूस खान, श्रीचंद कृपलानी, पूर्व भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी, मावली विधायक धर्मनारायण जोशी, उदयपुर के मेयर जीएस टांक, डिप्टी मेयर पारस सिंघवी और भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली भी मौजूद रहे।
वसुंधरा समर्थकों के साथ हुई थी धक्का-मुक्की
हाल ही में कोटा में प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक हुई थी। इसमें वसुंधरा राजे के समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की हुई थी। इससे सियासी पारा भी गरमा गया था। वसुंधरा समर्थक पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत को मीटिंग में शामिल नहीं होने दिया गया। नाराज वसुंधरा समर्थकों ने नारेबाजी की थी। मामला हाथापाई तक पहुंच गया था। वसुंधरा राजे इस घटनाक्रम से नाराज हो गई और मीटिंग को संबोधित किए बिना ही रवाना हो गई।