झीलों की नगरी उदयपुर में मंगलवार को विजयादशमी का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के गांधी ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। यहां 100 फीट लंबी लंका का दहन किया गया। इसके बाद 70 फीट ऊंचे रावण और 65-65 फीट ऊंचे मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों को जलाया गया। भगवान श्रीराम के जयकारों और भव्य आतिशबाजी के बीच पूरा गांधी ग्राउंड उत्सव के रंग में रंग गया। पुतला दहन देखने के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
पहले जली 100 फीट लंबी लंका, फिर हुआ पुतलों का दहन
बिलोचिस्तान पंचायत और सनातन धर्म सेवा समिति की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले 100 फीट लंबी लंका का दहन किया गया। इसके बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों को आग के हवाले किया गया। पुतलों के जलते ही मैदान में मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके साथ ही आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। इस भव्य नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग गांधी ग्राउंड पहुंचे थे।
शक्तिनगर से निकली शोभायात्रा, आकर्षक झांकियों ने मोहा मन
गांधी ग्राउंड में मुख्य कार्यक्रम से पहले शहर के शक्तिनगर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शहर के अलग-अलग रास्तों से गुजरते हुए गांधी ग्राउंड पहुंची। इसमें शामिल आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। रास्ते में भी लोगों ने शोभायात्रा को उत्साह के साथ देखा। शोभायात्रा के गांधी ग्राउंड पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान श्रीराम के जयकारों और आतिशबाजी के बीच रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया।
बारिश ने बढ़ाई आयोजकों की चिंता, मौसम साफ होने पर मिली राहत
विजयादशमी के मुख्य कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले उदयपुर में बारिश होने लगी थी। इससे आयोजकों की चिंता बढ़ गई। बारिश शुरू होते ही आयोजन समिति के सदस्य लंका और पुतलों को भीगने से बचाने में जुट गए। हालांकि, कुछ ही देर बाद बारिश रुक गई और मौसम साफ हो गया। इससे आयोजकों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुआ। हजारों लोगों ने गांधी ग्राउंड में रावण दहन का नजारा देखा और उत्सव में हिस्सा लिया।
उदयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है आयोजन
गांधी ग्राउंड में होने वाला विजयादशमी का यह आयोजन उदयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा बन चुका है। हर साल शाम होते ही गांधी ग्राउंड की ओर लोगों की आवाजाही बढ़ने लगती है। परिवारों के साथ पहुंचे लोग, बच्चों का उत्साह, विशाल पुतले और रंग-बिरंगी आतिशबाजी इस आयोजन को खास बनाते हैं। इस दौरान कई लोग अपने मोबाइल कैमरों में रावण दहन के यादगार पलों को कैद करते नजर आते हैं। बिलोचिस्तान पंचायत और सनातन धर्म सेवा समिति की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम अपनी भव्यता और लोगों की भागीदारी के लिए खास पहचान रखता है। विजयादशमी पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच संपन्न हुआ यह आयोजन धार्मिक आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बना।