सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व से जिस खूंखार बाघ टी-104 को मंगलवार सुबह उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था। उसी बाघ की मंगलवार रात मौत हो गई। राजसिको के चेयरमैन और राज्य मंत्री राजीव अरोड़ा ने इस घटना पर वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
यह है पूरा मामला
बाघ टी 104 की असमय मौत से जहां एक ओर वन्यजीव प्रेमियों में निराशा है। वहीं, दूसरी ओर रणथंभौर वन विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में मंगलवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे बाघ की मौत हो गई। हालांकि, अब तक इस संबंध में सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के अधिकारियों की ओर से स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा रहा है, लेकिन सूत्रों की मानें तो अब टी-104 भी दम तोड़ चुका है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बाघ को रणथम्भौर के भिड नाके पर बने एनक्लोजर में मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 35 मिनट पर ट्रेंकुलाइज किया गया था। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे बाघ को रणथम्भौर से उदयपुर के लिए रवाना किया गया। जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 1.30 से 2 बजे के बीच में वन विभाग की टीम बाघ को लेकर उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क पहुंची थी। इसके बाद वन विभाग की ओर से बाघ की कई घटों तक पिंजरे में मॉनिटरिंग की गई और बाघ को रात करीब 8 बजे बायोलॉजिकल पार्क में रिलीज किया गया था।
रात 11.30 बजे तोड़ा दम
इसके बाद बाघ करीब रात 10 बजे वहां बने एक वाटर हॉल में जाकर पानी में बैठ गया। करीब एक घंटे तक पानी में बैठने के बाद बाघ करीब देर रात 11 बजे के करीब पानी से निकलकर दूसरी जगह जाकर बैठ गया। इस दौरान वन विभाग की ओर से बाघ की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। गश्त कर रहे वनकर्मी जब रात करीब रात साढ़े 11 बजे उस स्थान पर वापस आए, तब बाघ उन्हें उसी स्थान पर लेटा हुआ नजर आया। इससे वन कर्मियों को अनहोनी होने का शक हुआ। इसके बाद वन कर्मियों ने शोर मचाकर बाघ को उठाने का प्रयास किया, लेकिन बाघ ने कोई मूवमेंट नहीं किया। इसके बाद नजदीक जाने पर पता चला की बाघ की मौत हो चुकी है।
वैक्सीन दवा की ओवरडोज से मौत की आशंका
रणथंभौर से बाघ को सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क रवाना करने के बाद बाघ को पूरी तरह से स्वस्थ बताया गया था। लेकिन कुछ ही घंटों में बाघ की मौत होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अब तक वन विभाग की ओर से बाघ की मौत के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो बाघ को ट्रेंकुलाइज करते समय दवा की ओवरडोज को मौत का कारण बताया जा रहा है। हालांकि अब तक वन विभाग की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है। मामले को लेकर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के वन अधिकारियों का कहना है कि उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ टी-104 की मौत की सूचना मिली है। लेकिन उन्हें इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। अधिक जानकारी सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से ही मिल सकती है।
राज्य मंत्री ने वन विभाग को बताया आरोपी
राजसिको के चेयरमैन और राज्य मंत्री राजीव अरोड़ा ने कहा कि बाघ टी-104 की मृत्यु की खबर अत्यंत दुःखद है। भीषण गर्मी में बाघ को दिन के समय अपने स्थान से करीब 700 किलोमीटर दूर बंद गाड़ी से शिफ्ट करने में लापरवाही की गई। प्रारंभिक रूप में यह संबंधित विभाग और अधिकारियों की असंवेदनशीलता और लापरवाही को दर्शाता है। अरोड़ा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी से आग्रह किया कि इस अति संवेदनशील विषय पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करें।