राजस्थान के टोंक जिले में 20 वर्षीय मूक-बधिर और मानसिक रूप से कमजोर युवती से दुष्कर्म के मामले में स्पेशल जज (अनुसूचित जाति-जनजाति) आरती माहेश्वरी ने शुक्रवार को आरोपी रामलाल को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 1.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के दौरान जज ने पीड़िता के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए एक कविता भी लिखकर पढ़ी।
जज की कविता
जज आरती माहेश्वरी ने फैसले में कविता के माध्यम से सामाजिक संदेश देते हुए लिखा कि वो बोल न सकी पर सच चुप न रहा, खामोशी ने भी अपराधी को पहचाना, नजरों की भाषा में सच उजागर हुआ, हर संकेत ने अपराध को बेनकाब किया, आई फिर एक रोशनी, बहिन बनी आधार, थामा उसका हाथ जब, टूटा सारा अंधकार, मौन सही पर हार नहीं, रूह रही मजबूत, हर अन्याय के सामने, सच रहता है अटूट, मत समझो उसको कमजोर, उसमें भी शक्ति घोर, हर निःशब्द की यह पुकार, सम्मान ही उसका है अधिकार, न्याय की राह जगानी है, हर आवाज सुनवानी है, अब वक्त है आवाज उठाने का, हर खामोश को न्याय दिलाने का।
सरकारी वकील मेघराज जाट ने बताया कि मामला 19 मई 2024 का है। पीड़िता की मां ने उसी दिन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता 20 साल की है और मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर होने के साथ मूक-बधिर भी है। घटना वाले दिन युवती घर में अकेली थी। आरोपी घर में घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया। जब युवती ने मदद के लिए चिल्लाने की कोशिश की तो ग्रामीण दौड़कर पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया।
पढ़ें- Udaipur News: 22 साल तक आंखों में धूल झोंकता रहा डकैत, आखिर साधु बनकर पुलिस ने शातिर देवीसिंह को ऐसे पकड़ा
आरोपी के पास मिले दस्तावेजों से उसकी पहचान भवानीपुरा निवासी रामलाल (52) के रूप में हुई। रामलाल कमीशन पर ईंटें दिलाने का काम करता था। घटना के बाद ग्रामीणों और महिलाओं ने आरोपी की पिटाई भी की थी।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद 24 जुलाई 2024 को कोर्ट में आरोप पत्र (चालान) पेश किया। मुकदमे में 16 गवाह, 33 दस्तावेज और 5 अन्य सबूत पेश किए गए। जज आरती माहेश्वरी ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर रामलाल को दोषी करार दिया। कोर्ट ने पीड़िता के परिजनों को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी अनुशंसा की है।