सीकर जिले में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बीते दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच मंगलवार सुबह करीब एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई, जिसने पूरे शहर की तस्वीर ही बदल दी। तेज हवाओं के साथ सुबह करीब सात बजे शुरू हुई बारिश से शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। नवलगढ़ रोड, बजाज रोड, राधाकिशनपुरा अंडरपास, लोहारू बस स्टैंड, सिटी डिस्पेंसरी नंबर दो और कल्याण जी मंदिर क्षेत्र समेत कई स्थानों पर जलभराव से सड़कें लबालब हो गईं।
सड़कों पर नालों का गंदा पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह लोग जान जोखिम में डालकर जलमग्न सड़कों से गुजरते नजर आए। जलभराव ने नगर परिषद और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी। हर बार मानसून से पहले स्थाई समाधान का दावा करने वाले जिम्मेदार अधिकारी इस बार भी सिर्फ दौरे और निर्देशों तक ही सीमित दिखे।
यह भी पढ़ें- Jalore: एक राज छिपाने को पत्नी ने प्रेमी संग मिल पति की हत्या की, खुदकुशी का दिया था रूप; इसलिए कबूला जुर्म
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही अतिरिक्त जिला कलेक्टर रतन कुमार और नगर परिषद के अधिकारियों ने जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया था और जरूरी निर्देश भी जारी किए थे। लेकिन हकीकत में हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। थोड़ी सी बारिश में ही शहर की प्रमुख सड़कें तालाब बन गईं और आवागमन बाधित हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर बार बारिश से पहले बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहता है। अब सवाल उठता है कि क्या इस बार मानसून से पहले कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या फिर आमजन को हर साल की तरह इस बार भी जलभराव की समस्या से दो-चार होना पड़ेगा। प्रशासन को चाहिए कि वह सिर्फ दिखावटी निरीक्षण की बजाय स्थाई समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास करे, ताकि आने वाले मानसून में शहरवासियों को राहत मिल सके।
यह भी पढ़ें- Dholpur News: खदान के पास मिट्टी ढहने से अधेड़ की मौत, बकरी चराने के दौरान हुआ हादसा; पुलिस ने शुरू की जांच