नीतियांस की खांसी की दवा पीने से मौत
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सीकर जिले में सरकारी अस्पताल द्वारा दी गई दवा से 5 वर्षीय मासूम नितियांस की मौत ने लोगों में चिंता और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। घटना खोरी ब्राह्मणान गांव की है, जहां परिजनों का कहना है कि दवा पीने के बाद बच्चे की सांसें रुक गईं। मामले में परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने से इनकार किया और बच्चे का अंतिम संस्कार अपने घर पर ही कर दिया।
सरकारी अस्पताल में दिया गया सिरप
परिजनों के अनुसार, नितियांस को कई दिनों से खांसी की शिकायत थी। उसकी मां खुशी उसे नजदीकी चिराना सीएचसी लेकर गई, जहां उसे खांसी के इलाज के लिए सिरप दिया गया। बीती रात करीब 11:30 बजे यह दवा बच्चे को पिलाई गई। रात करीब 3:30 बजे बच्चे को हिचकी शुरू हुई, जिसे देखकर उसकी मां ने पानी पिलाया, लेकिन सुबह तक बच्चा जागा नहीं। इसके बाद परिजन उसे सीकर के एसके अस्पताल लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
परिवार ने पोस्टमार्टम से किया इनकार
स्थानीय दादिया थानाधिकारी बुद्धिप्रसाद ने बताया कि परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। परिवार ने पुलिस को बताया कि उनके बच्चे की मौत दवा पीने के बाद हुई और उनका बच्चा पहले से खांसी से परेशान था।
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पहले भी सामने आ चुके मामले
राजस्थान में यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी दवा से बच्चों की तबीयत बिगड़ी हो। सीकर जिले के अजीतगढ़ में 3 साल के किट्टू और 1.5 साल के टिंकू की हालत दवा पीने के बाद बिगड़ी थी, जिन्हें जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया। वहीं भरतपुर में भी 3 वर्षीय गगन की खांसी की दवा से हालत बिगड़ने पर उसे जयपुर ले जाया गया। इन सभी मामलों में परिजनों ने दावा किया कि बच्चों की स्थिति दवा पीने के कारण खराब हुई।
खांसी की दवा और रोक का आदेश
मृतक नितियांस को दी गई दवा का नाम डेक्सट्रोमेथोरफन हाइड्रोब्रोमाइड है, जो मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत वितरण की जाती है। हाल ही में राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस कंपनी की दवा के केंद्रों पर वितरण पर रोक लगा दी है।
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