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Rajasthan: राजस्थान के इस जंगल वर्षों में एक बार दिखता है ऐसा नजारा, जहां सब था केसरिया, वहां दिखे पीले पलाश

Thu, 23 Apr 2026 08:45 AM IST
सवाई ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर

सार

Rajasthan: सवाई माधोपुर जिले के बौंली क्षेत्र के गोल वन क्षेत्र में दुर्लभ पीले पलाश के दो पेड़ मिलने से वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है। आमतौर पर केसरिया रंग में खिलने वाला पलाश यहां पीले रंग में खिला दिखाई दिया, जो बेहद दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है।  
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सवाई माधोपुर में मिला बेहद रेयर येलो पलाश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सवाई माधोपुर जिले के सामाजिक वानिकी के बौंली क्षेत्र के गोल वन क्षेत्र में सैकड़ों केसरिया पलाश के पेड़ों के बीच पलाश के दो पेड़ों पर खिले पीले फूलों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पलाश को 'फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट' के नाम से जाना जाता है, लेकिन पीले रंग का पलाश बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा ल्यूटिया है, जो सामान्य पलाश से अलग प्रजाति है। वन विभाग के अनुसार, गोल वन क्षेत्र में करीब दो साल पहले पहली बार पीले पलाश का फूल देखा गया था और इस साल फिर से इसका खिलना बेहद खास माना जा रहा है।

संरक्षित श्रेणी में आती है यह दुर्लभ प्रजाति
पीले पलाश की यह प्रजाति संरक्षित श्रेणी में आती है और बहुत कम स्थानों पर ही देखने को मिलती है। यह एक दुर्लभ प्रजाति है, जिसे वन विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। वनाधिकारियों के मुताबिक, पीले पलाश के बीज एकत्र कर नर्सरी में पौधे तैयार किए जाएंगे और अन्य स्थानों पर भी इसे लगाया जाएगा। पीला पलाश अधिकतर दक्षिणी क्षेत्र, जैसे उदयपुर और चित्तौड़गढ़ की ओर पाया जाता है। यह पहला मौका है जब सवाई माधोपुर जिले में दो पीले पलाश के पेड़ मिले हैं।

वन विभाग ने शुरू की संरक्षण की पहल
सामाजिक वानिकी वन विभाग की टीम ने गश्त के दौरान इस दुर्लभ पेड़ को चिन्हित कर उसके फोटो लिए और उच्च अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद क्षेत्र में मिले पीले पलाश के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसके चलते अब वन विभाग इसके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रहा है।

औषधीय गुणों से भरपूर है पलाश
पलाश के फूल जहां अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं इनमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। प्राचीन समय में होली के प्राकृतिक रंग भी इन्हीं फूलों से बनाए जाते थे। फिलहाल बौंली वन क्षेत्र में मिला यह पीला पलाश न सिर्फ वन विभाग के लिए, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण बना हुआ है और आने वाले समय में इसके संरक्षण की दिशा में बड़े प्रयास किए जाएंगे।

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भविष्य में बढ़ेगा आकर्षण और सुंदरता
आमतौर पर सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर सहित अन्य जगहों पर केसरिया पलाश के पेड़ पाए जाते हैं, जो अपने केसरिया फूलों से लोगों का मन मोह लेते हैं। लेकिन बौंली वन क्षेत्र में मिले पीले पलाश के दो पेड़ों पर खिले पीले फूल वाकई बेहद सुंदर और आकर्षक नजर आ रहे हैं, जो लोगों को खूब भा रहे हैं। यदि वन विभाग इन पीले पलाश के पेड़ों को संरक्षित करता है और इनके बीजों से नर्सरी में नए पौधे तैयार कर उनका रोपण करता है, तो जिले में केसरिया के साथ ही पीले पलाश की महक एवं सुंदरता भी लोगों के लिए खास आकर्षण बन सकती है।

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